(चंडीगढ): हरियाणा की भाजपा सरकार तो
सरकारी नौकरियों में भर्ती पारदर्शी तरीके से मेरिट के आधार पर करने के
दावे करती है लेकिन तथ्य सरकार के इन दावों पर सवाल खडे कर रहे हैं। स्टाफ
सेलेक्शन कमीशन के कामकाज की जांच करने वाले जस्टिस रिटायर्ड दर्शन सिंह
कमीशन द्वारा अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दिए जाने की खबर है। रिपोर्ट में
स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए है। रिपोर्ट में कहा
गया है कि कमीशन ने नौकरियों में भर्ती को लटका कर रखा।
निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही सरकार
इस बीच हिसार से इंडियन नेशनल लोकदल के
सांसद दुष्यंत चौटाला ने सूचना का अधिकार कानून के तहत प्रदेश के 22 जिलों
में से 12 जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि सरकार ने युवाओं को
संवैधानिक अधिकार के तहत नियमित भर्ती मे शामिल होने का अवसर देने के बजाय
गुजरात की कम्पनियों के जरिए कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की
है।
सैंकडों पद खाली
सांसद ने कहा कि प्रदेश में ग्रुप सी व डी
के सैकडों पद खाली है लेकिन सरकार इन पदों को नियमित तरीके से भरने के
बजाय निजी कम्पनियों को लाभ पहुंचाने के लिए उनके जरिए नियुक्तियां कर रही
है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा विभाग में तीन हजार जेबीटी टीचर्स की
मांग थी। इस मांग को निजी कम्पनियों के जरिए पूरा किया जा रहा है। राज्य
सरकार ने इसके लिए 19 कम्पनियों का पैनल बनाया है। इस पैनल को मुख्यमंत्री
के स्तर पर ही मंजूर किया गया है। इस पैनल में ज्यादातर सिक्योरिटी सेवाएं
देने वाली कम्पनियां है। इनमें गुजरात व चंडीगढ़ की कम्पनियां हैं।
सिक्योरिटी देने वाली कम्पनियों के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही
हैं। शिक्षकों के अलावा दसवीं पास बहुउदृृदेशीय कर्मचारी भी नियुक्त किए जा
रहे है। ये कम्पनियां 2.01 फीसदी कमीशन पर स्टाफ मुहैया करायेंगी और पद व
वेतन के अनुपात में करोडों रूपए कमा लेंगी।
एसवाईएल पार्टी का जेल भरों आंदोलन जारी
दुष्यंत ने कहा कि इस तरह की जा रही
नियुक्तियों पर शिक्षा विभाग को कानूनी नोटिस भेजा गया है। जवाब न मिलने पर
हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जायेगी। उन्होंने कहा कि अभी उनकी
पार्टी एसवाईएल के मुद्ये पर जेल भरो आंदोलन चला रही है। इसके समाप्त होने
पर रोजगार मेरा अधिकार मुहिम शुरू की जायेगी।