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न सरकार झुक रही न कर्मचारी, धरने में ही बीत गई दीवाली

जेएनएन, चंडीगढ़। कच्चे से पक्का होने का इंतजार कर रहे विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 40 हजार कच्चे मुलाजिम अपनी मांगों को लेकर धरने पर हैं। सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान (एसएसए) और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के 8886 शिक्षकों को पक्का करने का न्योता तो दे दिया है, लेकिन 15000 रुपये
वेतनमान की शर्त के साथ। शिक्षकों को अपने प्रशिक्षु काल में 15000 के वेतनमान पर ही काम करना पड़ना है। शिक्षक पक्का भी होना चाहते हैं और वर्तमान वेतन भी, जबकि सरकार उन्हें पक्का होने की सूरत में बेसिक वेतनमान ही देने को तैयार है।

पटियाला में रमसा व एसएसए शिक्षक करीब 30 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। सरकार पर दबाव बनाने के लिए शिक्षकों के परिजन भी धरने में शामिल हो चुके हैं। दूसरी तरफ सरकार इस मुद्दे पर बिल्कुल झुकने को तैयार नहीं है। शिक्षा मंत्री के साथ कई दौर की बैठक के बावजूद इस समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया है।

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शिक्षक संगठनों की गत दिवस मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मुलाकात होनी थी, लेकिन इस मुलाकात को कैंसिल कर दिया गया। इसका मुख्य कारण भी यही रहा कि शिक्षक पूरे वेतन को लेकर पीछे नहीं हटना चाहते। सरकार यह सोच रही है कि 8886 शिक्षकों के मामले में कोई छूट दी तो 40,000 कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने की राह में यह सबसे बड़ा कांटा बन जाएगा। पिछले एक दशक से एसएसए और रमसा के तहत ठेके पर भर्ती किए गए शिक्षक वर्तमान में 35,000 से लेकर 42 हजार रुपये तक वेतन ले रहे हैं। यह शिक्षक पक्के तो होना चाहते हैं लेकिन पूरे वेतनमान पर। वहीं, अकाली-भाजपा सरकार के दौरान लिए गए फैसले के अनुसार सरकार तीन साल तक किसी भी मुलाजिम को बेसिक वेतनमान पर काम करना होगा।

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पंजाब सरकार ने डॉक्टरों के मामले में पूर्व सरकार के फैसले को पलट दिया था। अस्पतालों में डॉक्टर न मिलने के कारण सरकार ने डॉक्टरों को तीन वर्षों के लिए बेसिक वेतनमान के दायरे से बाहर कर दिया था। वहीं, शिक्षकों को भी कुछ छूट दी थी। सरकार ने 10,300 बेसिक वेतनमान में 5 हजार रुपये की वृद्धि और तीन साल के प्रशिक्षु काल को 2.6 माह करने का फैसला किया था।

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सरकार की चिंता मुख्य रूप से आर्थिक मोर्चे पर है। एसएसए और रमसा केंद्र सरकार की योजना होने के कारण अभी तक शिक्षकों के वेतन में 60 फीसद योगदान केंद्र सरकार भी डालता था। इन शिक्षकों को पक्का करने में सारा खर्च राज्य सरकार को उठाना पड़ेगा। इन दोनों ही योजनाओं को केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान में मर्ज कर दिया है। वहीं, सरकार की चिंता है कि केंद्र प्रायोजित इस योजना के तहत अगर शिक्षकों के मामले में सरकार और अधिक लचीला व्यवहार अपनाती है तो राज्य सरकार की ओर से रखे गए 40 हजार कच्चे मुलाजिमों के मामले में दिक्कत आ सकती है, क्योंकि उन्हें पक्का करने के दौरान दोबारा एक नया विवाद खड़ा हो जाएगा।

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15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि 40,000 कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने के लिए पंजाब सरकार विशेष सत्र बुलाएगी। हालांकि, यह कच्चे मुलाजिम मंत्रियों व विधायकों को मिठाई के डिब्बे में कोयला भेंटकर अपना विरोध दर्ज करवा रहे है। रमसा और एसएसए शिक्षकों को पांच माह से वेतन नहीं मिला है। अंतिम तनख्वाह मई माह में मिली थी। तब से उनकी तनख्वाह रुकी हुई है।

गुमराह कर रही सरकार: चौधरी

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एसएसए व रमसा अध्यापक यूनियन के वाइस प्रेसिडेंट राम भजन चौधरी का कहना है कि सरकार शिक्षकों के मामले में गुमराह कर रही है। सरकार भ्रम फैला रही है कि समग्र्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार फंड नहीं भेज रही। यह बिल्कुल गलत है। केंद्र सरकार की तरफ से 15,000 रुपये प्राइमरी कैडर के लिए आ रहे हैं। सरकार बेहद चालाकी से अपना हिस्सा बचाना चाहती है। यूनियन नेता ने कहा कि एक तरफ सरकार बेसिक वेतनमान की बात कर रही है। अगर सरकार 5000 रुपये बेसिक वेतनमान से वृद्धि कर सकती है तो पूरे वेतनमान को भी कर सकती है।

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शिक्षा मंत्री ओपी सोनी से सवाल-जवाब

शिक्षक 30 दिनों से धरने पर है, इससे पढ़ाई बाधित नहीं हो रही?

    स्कूल बिल्कुल ठीक-ठाक चल रहे हैं। स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक हैं। कुछ यूनियन लीडर धरने पर बैठे हुए हैं।

दीपावली आ गई है, सरकार गतिरोध खत्म करने के लिए क्या कर रही है?

    कोई गतिरोध नहीं है। हम कई बार बात कर चुके हैं। वह अगर अपनी जिद पर अड़े हैं, तो हम क्या कर सकते हैं।

40 हजार रुपये वेतन लेने वाले को 15000 रुपये वेतन देना तर्कसंगत है?

    यह फैसला हमने नहीं किया। यह किसी एक व्यक्ति पर लागू नहीं किया गया। शिक्षकों के पास दोनों ही विकल्प हैं। अगर कोई शिक्षक पूरा वेतन चाहता है, तो वह कॉन्ट्रेक्ट आधार पर काम करता रहे। हमें कोई दिक्कत नहीं। अगर पक्का होना चाहता है, तो जो नियम है, उसे पूरा करे। हमने तो पहले ही थोड़ी छूट दी है। 5000 रुपये अतिरिक्त वेतन व प्रोबेशन पीरियड में 6 माह की कटौती की है।

वेतन में कटौती व तबादलों से भड़के शिक्षक

अध्यापक साझा मोर्चा के प्रांतीय कन्वीनर दविंदर सिंह पूनिया का कहना है कि अध्यापक साझा मोर्चा की ओर से काली दिवाली मनाने का फैसला इसलिए किया गया है, क्योंकि अध्यापकों की तनख्वाह में कटौती की गई है। 100 से ज्यादा अध्यापकों की 300 किलोमीटर दूर बदली कर दी गई। करीब 30,000 अध्यापक कॉन्ट्रेक्ट पर हैं। इस कारण सरकार ने अध्यापकों को काली दिवाली मनाने के लिए मजबूर कर दिया है।

तनख्वाह कटौती का असर सारे परिवार पर, इसलिए समर्थन में

परिवार के साथ अध्यापकों का धरने पर बैठने पर शिक्षकों का कहना है कि परिवार उनसे मिलने आते हैं और वहीं बैठ जाते हैं। सरकार बच्चों को खुद संघर्ष की राह पर चलने के लिए तैयार कर रही है। दिमागी तौर पर तो परिवार हर समय साथ है ही, लेकिन अपने परिजनों का हाल जानने के लिए धरने में आते हैं और सरकार खिलाफ अपना रोष व्यक्त करते हैं। तनख्वाह कटौती का असर सारे परिवार पर ही पड़ेगा। सपने टूटते हैं तो पूरे परिवार के टूटते हैं, इसलिए परिवार साथ बैठते हैं।

किसान, मजदूर संगठनों का भी साथ

इस समय अध्यापक साझा मोर्चा में शामिल 26 अध्यापक जत्थेबंदियों के अलावा 40 अन्य मुलाजिम, किसान, मजदूर और स्टूडेंट्स की जत्थेबंदियों ने अध्यापक साझा मोर्चा का समर्थन किया है। उनका कहना है कि अगला एक्शन काफी सख्त होगा और इसमें अध्यापकों के साथ सहयोगी जत्थेबंदियों के सदस्य भी शामिल होंगे। (इनपुटः कैलाश नाथ व गौरव सूद)

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