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शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा ,सरकारी स्कूलों पर इसका विपरीत असर

 जागरण संवाददाता, रोहतक : सरकारी से निजी विद्यालयों में दूसरी से 12वीं कक्षा तक के बच्चों के दाखिले काे लेकर शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। शिक्षकों ने विभाग के इस फैसले का विरोध करने पर मंथन शुरू कर दिया है।

हालांकि उनके विरोध का तरीका क्या होगा, इसका फैसला बाद में लिया जाएगा। लेकिन शिक्षक अभी से लामबंद होने लगे हैं। पिछले दिनों शिक्षा विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया।

जिसमें अधिकारियों ने कहा है कि निजी विद्यालयों में गरीब बच्चों के दाखिले पर विभाग की ओर से शुल्क राशि वहन की जाएगी। इसको लेकर शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि विभाग की ओर से दूसरी से पांचवीं कक्षा तक प्रति छात्र 700 रुपये, कक्षा छठी से आठवीं तक प्रति छात्र 900 रुपये व कक्षा नौवीं से 12वीं तक प्रति छात्र 1100 रुपये मासिक फीस या फार्म-6 में घोषित शुल्क राशि जो भी कम होगी, वह इन विद्यालयों को अदा की जाएगी।

इसके लिए निजी स्कूलों को 30 अप्रैल आधी रात तक पोर्टल पर पंजीकरण अपनी सहमति देनी है। परिवार पहचान पत्र के अनुसार जिन अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख 80 हजार या उससे कम है। उन छात्रों के दाखिले मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कराए जा सकते हैं। हालांकि सरकार के इस फैसले से कई अभिभावक खुश भी है। उनका कहना है कि इससे उनके बच्चे निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। लेकिन विभाग के इस फैसले से शिक्षकों में रोष पैदा हो गया है।

सरकारी स्कूलों में कम हो सकती है संख्या

शिक्षकों की मानें तो इस फैसले से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हो सकती है। अधिकारियों की ओर से एक तरफ तो सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाए जाने पर जोर दिया जा रहा है तो वहीं, दूसरी ओर इस प्रकार के फैसल लिए जा रहे हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी होगी। ऐसे फैसलों से शिक्षक असमंजस में हैं।

राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ सौंपेगा ज्ञापन

इस संबंध में राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से शुक्रवार दोपहर बाद एक ज्ञापन भी मौलिक शिक्षा अधिकारी को सौंपा जाएगा। जिसमें इस फैसले को वापस लिए जाने की मांग की जाएगी। शिक्षकों का कहना है कि इससे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी स्कूलों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा।

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