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दिवाली तक हटाए गए गेस्ट टीचरों की दोबारा नियुक्ति की उम्मीद नहीं

एडवोकेट जनरल से मांगी 2 महीने में रेगुलर भर्ती करने की अंडरटेकिंग।
चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाण्ाा हाई कोर्ट ने हटाए गए सरप्लस टीचरों को दोबारा रखने की अपील पर हरियाणा सरकार को साेमवार को तगड़ा झटका दिया। हाई कोर्ट ने मंत्रियाें व नेताओं के इस मामले में बयानों पर भी कड़ी नाराजगी जताई। हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत नेताओं के बयान से फैसला नहीं करती।
जस्टिस एस के मित्तल के नेतृत्व वाली की खंडपीठ ने कहा, हरियाणा के राजनेता क्या कहते हैं और क्या करते है इस बात का कोर्ट पर कोई असर नही पड़ता,। नेताओं के बयान से हाईकोर्ट के फैसले नहीं होते। खंडपीठ ने यह टिप्पणी हरियाणा सरकार द्वारा हटाए गए सरप्लस गेस्ट टीचरों की दोबारा बहाली के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। राज्य सरकार ने इस पर तुरंत सुनवाई करने की मांग की थी।
बहस के दौरान खंडपीठ को बताया गया की सरकार ने पहले भी एक अर्जी दायर की थी और गेस्ट टीचरों की भी एक अपील इस मामले में कोर्ट में लंबित है। इस पर कोर्ट ने सुनवाई की तारीख 15 दिसंबर तक तय की हुई है। लेकिन, हरियाणा के शिक्षा मंत्री ने वादा किया है कि की की इन गेस्ट टीचरों को दिवाली से पहले ज्वाइन करवा देंगे। इस पर खंडपीठ ने कहा की राजनेता क्या वायदा करते हैं अदालत यह नहीं देखता। हार्इ कोर्ट इस पर अपने हिसाब से सुनवाई करेगी।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने हरियाणा के महाधिवक्ता बलदेव महाजन से कहा कि क्या आप ये अंडरटेकिंग दे सकते हैं कि एक तय समय में नियमित टीचर की भर्ती कर देंगे तो हम आपको इजाजत दे सकते हैं। इस पर महाधिवक्ताने कहा हमने एकल पीठ के सामने हलफनामा पहले ही दिया जा चुका है।
इस पर खंडपीठ ने कहा कि हमें ठोस आश्वासन चाहिए। हमें लगता है कि सरकार नियमित भर्ती के लिए गंभीर नही हैं। इसमें किसी का नुकसान नहीं हो रहा है, नुकसान झेल रहे है तो केवल छात्र, जो टीचरों के अभाव में पढ़ नहीं पा रहे हैं। खंडपीठ ने सरकार से कहा कि अगर उसमें इच्छाशक्ति हो तो वह दिन-रात एक कर नियमित भर्ती के लिए काम कर सकती है। इसके बाद खंडपीठ ने सरकार की अर्जी पर सभी पक्षों को 17 नवंबर के लिए नोटिस जारी कर मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
सरकार ने क्या कहा है अपनी अर्जी में 
हरियाणा सरकार ने हटाए गए 3581 सरप्लस गेस्ट टीचरों को पुन बहाल करने के लिए दायर अर्जी पर तुरंत सुनवाई का आग्रह किया था। इस अर्जी में सरकार ने कहा कि गेस्ट टीचरों के बिना स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है और 15 दिसंबर को सुनवाई होने की स्थिति में पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।
गेस्ट टीचरों को हाई कोर्ट के आदेश पर हटाया गया था। सरकार ने अर्जी दायर कर कहा है कि वह 6 जुलाई को हटाए गए इन गेस्ट टीचरों को शिक्षकों की नियमित भर्ती तक सेवा में रखना चाहती है। इसके लिए हाई कोर्ट उसे इजाजत दे

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