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विवि की स्वायत्ता को खत्म करना चाहती है सरकार : कटारिया

जागरण संवाददाता, रोहतक : राज्य सरकार विश्वविद्यालय की स्वायत्ता को खत्म करना चाहती है, लेकिन विश्वविद्यालय के कर्मचारी सरकार की इस मंशा को पूरा नहीं होने देंगे। विवि प्रशासन खुद के संसाधनों से आय बढ़ाकर व्यवस्था को चलाकर बेहतर शिक्षा विद्यार्थियों को प्रदान कर रहा है
लेकिन सरकार उनके आय के साधनों को खत्म करके उनकी स्वायतता छीनने की योजना बना रही है। यह बात महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय गैर शिक्षक संघ के प्रधान रणधीर कटारिया ने कही। वे बृहस्पतिवार को फैकल्टी हाउस में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।
प्रधान रणधीर कटारिया ने कहा कि विश्वविद्यालय के आमदनी के साधनों में बीएड कालेज भी शामिल हैं। मदवि से संबद्ध 300 से अधिक बीएड कालेज है, जिनको सरकार जींद में स्थिति एजुकेशन विश्वविद्यालय के अधीन कर रही है। जींद विश्वविद्यालय में अभी तक मूलभूत ढांचा ही तैयार नहीं हुआ है तो ऐसे में बीएड कालेजों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा कैसे प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मदवि व अन्य विवि को बीएड कालेजों से होने वाली आमदनी से शिक्षा के लिए संसाधन जुटाए जा रहे है। अगर बीएड कालेज विवि के अधिकार क्षेत्र में नहीं रहेंगे और मदवि पर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार विश्वविद्यालय को पहले ही आर्थिक सहायता ऊंट के मुंह में जीरे के समान देती है। इससे विवि में आगे चलकर कर्मचारियों को वेतन तक के लाले पड़ जाएंगे। उन्होंने बताया कि मदवि का वर्ष 2016-17 में 424.52 लाख रुपये का खर्च है जबकि आमदनी 298.69 है। सरकार की तरफ से मदवि को ग्रांट मात्र 24 करोड़ रुपये की मिली है। ऐसे में सरकार किस आधार पर विवि पर अधिकार जमाना चाहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर मुलाकात का समय लिया जाएगा। अगर दो सप्ताह में मुलाकात का समय नहीं दिया गया तो कर्मचारी आंदोलन करने पर मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि सात-आइ मई को लखनऊ में अखिल भारतीय विवि कर्मचारी संघ की सम्मेलन होगा, जिसमें आगामी रणनीति तय की जाएगी।
अंतर विवि तबादला नीति की भी योजना

प्रधान रणधीर ¨सह ने बताया कि सरकार अंतर विवि कर्मचारी तबादला नीति लाने की योजना बना रही है। यह नीति विवि कर्मचारियों के लिए अभिशाप साबित होगा। विवि में लंबे समय से अपने-अपने कार्यों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले कर्मचारियों को अगर इस नीति के तहत अन्य विवि में भेजा गया तो कामकाज प्रभावित होगा। पहले से विवि में कर्मचारियों का अभाव है। इन नीति को भी संघ जोरदार ढंग से विरोध करेगा।
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