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स्मार्ट क्लास के लिए चुना गया केवल एक स्कूल

दीपक पांडेय, फरीदाबाद : जिलें में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण स्कूलों की स्थिति खराब होती जा रही है। आलम यह हो गया है कि अब सरकारी स्कूल स्मार्ट क्लास रूम खोलने के मानक भी पूरे नहीं कर पा रहे हैं।
शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बनाने के लिए शिक्षा विभाग से आवेदन मांगे थे, इसके लिए कुछ मानक भी तय किए गए थे। केवल एक ही स्कूल शिक्षा निदेशालय के मानको पर खरा उतर पाया है।
प्रदेश सरकार बच्चों के कंधों से बस्ते का बोझ कम करने के लिए किताबों को हटाकर डिजिटल क्लास रूम पर जोर दे रही है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बस्ते के बोझ के कारण बच्चों को कंधे और कमर दर्द की बीमारी हो रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने योजना बनाई थी कि पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बनाया जाए, जिसमें बच्चों की पढ़ाई डिजिटल तरीके से हो सके।
सेक्टर-28 का राजकीय मॉडल सीनियर स्कूल ही निकला स्मार्ट
स्मार्ट क्लास रूम बनाने के लिए राजकीय मॉडल स्कूल ही उपयुक्त पाया गया। सरकार की ओर से तय किया गया था कि जिन सरकारी स्कूलों की इमारत अच्छी होगी। स्कूल में 500 से अधिक बच्चे होंगे। जिनका परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत से अधिक होगा। उन स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बनाया जाएगा। सेक्टर-28 का राजकीय मॉडल सीनियर स्कूल ही इन मानकों पर खरा उतर सका है।
परीक्षा परिणाम भी खराब, भवन भी जर्जर
जिले के स्कूलों का परीक्षा परिणाम इस बार काफी खराब रहा था। दसवीं और बारहवीं में जिला प्रदेश में अंतिम स्थान पर रहा था। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा का स्तर किस कदर गिरता जा रहा है। वहीं अधिकतर सरकारी स्कूलों के भवन भी पूरी तरह से जर्जर हैं। कई स्कूलों की बेकार घोषित किया जा चुका है। बावजूद वहां पर बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षा विभाग और शिक्षा निदेशालय स्कूलों की इन खामियों को दूर करने का प्रयास नहीं कर रहा है।
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प्रदेश सरकार की ओर से स्मार्ट क्लास रूम बनाने के लिए आवेदन मांगे गए थे। हमने कुछ स्कूलों के नाम भेजे थे, लेकिन एक ही स्कूल स्मार्ट क्लास रूम बनाने के लिए चुना गया है। -मुनेश चौधरी, ब्लाक शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद।
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