चंडीगढ़. हरियाणा के शिक्षा विभाग पर ट्रांसफर पॉलिसी की अनदेखी कर 500 शिक्षकों को पुराने स्टेशन पर ही वापस भेजने का आरोप लगाने संबंधी एक याचिका वीरवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।
फिरोजपुर झीरका के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी के टीजीटी शिक्षक हसन मोहम्मद की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि हरियाणा सरकार की 29 जून की ट्रांसफर पॉलिसी के तहत उन्होंने अपने नए स्टेशन के विकल्प सौंपे थे। विकल्पों में उन्हें मेवात के नूह स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ट्रांसफर कर दिया गया था। याची ने वहां 6 अगस्त को अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली।
इसके बाद शिक्षा विभाग ने पॉलिसी के खिलाफ 10 अगस्त को एक आदेश जारी किए जिसमें नए अलॉट स्टेशनों से 500 शिक्षकों को दोबारा उनके पहले के स्टेशन पर वापस भेज दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह 2 जनवरी 1996 से फिरोजपुर झीरका के स्कूल में शिक्षण का कार्य कर रहें हैं और इसके बाद अब उन्हें उनकी पसंद का स्टेशन चुनने का मौका दिया गया था।
एक बार ट्रांसफर करने और याचिकाकर्ता द्वारा ज्वाइन कर लेने के बाद दोबारा उसी सेंटर पर वापस भेजना गलत है। ऐसे में फैसले को खारिज किया जाए।
फिरोजपुर झीरका के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी के टीजीटी शिक्षक हसन मोहम्मद की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि हरियाणा सरकार की 29 जून की ट्रांसफर पॉलिसी के तहत उन्होंने अपने नए स्टेशन के विकल्प सौंपे थे। विकल्पों में उन्हें मेवात के नूह स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ट्रांसफर कर दिया गया था। याची ने वहां 6 अगस्त को अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली।
इसके बाद शिक्षा विभाग ने पॉलिसी के खिलाफ 10 अगस्त को एक आदेश जारी किए जिसमें नए अलॉट स्टेशनों से 500 शिक्षकों को दोबारा उनके पहले के स्टेशन पर वापस भेज दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह 2 जनवरी 1996 से फिरोजपुर झीरका के स्कूल में शिक्षण का कार्य कर रहें हैं और इसके बाद अब उन्हें उनकी पसंद का स्टेशन चुनने का मौका दिया गया था।
एक बार ट्रांसफर करने और याचिकाकर्ता द्वारा ज्वाइन कर लेने के बाद दोबारा उसी सेंटर पर वापस भेजना गलत है। ऐसे में फैसले को खारिज किया जाए।