शिक्षाविभागके दो लिखित आदेशों ने जिलेभर के प्राथमिक शिक्षकों प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले 50 हजार विद्यार्थियों को भ्रमित कर दिया है। राजकीय स्कूलों में पहुंच वार्षिक रिपोर्ट कार्ड में पहली से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा में होने वाले पेपर के 30 से लेकर 80 अंक दिखाए गए हैं।
वहीं पत्र जारी कर 20 से 30 अंकों के पेपर आने की बात कही गई है। ऐसे में शिक्षकों को समझ नहीं रहा कि वे कौनसे आदेश को माने और कौनसे आदेश को नहीं माने। शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी भी पेपर के अंकों के आधार पर ही करवाई जाती है। ऐसे में वार्षिक परीक्षा को लेकर राजकीय स्कूलों में असमंजस पैदा हो गई है। गौरतलब है कि इस बार वार्षिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्र बोर्ड से तैयार होकर स्कूलों में पहुंचेगा।
जिलेभर के 498 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक 50 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इन सभी विद्यार्थियों को शिक्षकों ने रिपोर्ट कार्ड के अनुसार 30 80 अंकों की परीक्षा के लिए तैयार किया है, लेकिन फरवरी महीने में आए पत्र में 20 30 अंकों की परीक्षा करवाने के बारे में कहा गया है। इससे विद्यार्थी भी असमंजस में हैं।
लूंगीमामले का संज्ञान : जिलामौलिक शिक्षा अधिकारी परमजीत कौर ने कहा कि रिपोर्ट कार्ड और पत्र में पहली से पांचवीं कक्षा के लिए अलग-अलग अंकों की परीक्षा के आदेशों का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वे मामले का संज्ञान लेंगी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो आला अधिकारियों से बातचीत कर शिक्षकों विद्यार्थियों की उलझन को दूर करवाया जाएगा। ताकि विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा देने में कोई परेशानी हो।
यह है अंकों में अंतर
पहलीदूसरी का प्रश्नपत्र- 30 अंक
तीसरी से पांचवीं का प्रश्नपत्र- 80 अंक
पत्रके अनुसार अंक :
पहलीदूसरी का प्रश्नपत्र- 20 अंक
तीसरी से पांचवीं का प्रश्नपत्र- 30 अंक
498 स्कूलों में 50 हजार विद्यार्थी
उलझन में हैं शिक्षक
राजकीयप्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान विनोद चौहान ने कहा कि शिक्षा विभाग के दो लिखित आदेशों से सभी शिक्षक उलझन में हैं। उन्होंने कहा कि अब सभी शिक्षकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे कितने अंकों के प्रश्नपत्र के हिसाब से विद्यार्थियों की तैयारी करवाएं। शिक्षक सूबे सिंह, विकास, धर्मवीर और संजय ने कहा कि रिपोर्ट कार्ड के अनुसार प्रश्नपत्रों के अंक निर्धारित नहीं किए गए तो रिपोर्ट कार्ड में अंक भी नहीं भरे जा सकेंगे।
वहीं पत्र जारी कर 20 से 30 अंकों के पेपर आने की बात कही गई है। ऐसे में शिक्षकों को समझ नहीं रहा कि वे कौनसे आदेश को माने और कौनसे आदेश को नहीं माने। शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी भी पेपर के अंकों के आधार पर ही करवाई जाती है। ऐसे में वार्षिक परीक्षा को लेकर राजकीय स्कूलों में असमंजस पैदा हो गई है। गौरतलब है कि इस बार वार्षिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्र बोर्ड से तैयार होकर स्कूलों में पहुंचेगा।
जिलेभर के 498 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक 50 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इन सभी विद्यार्थियों को शिक्षकों ने रिपोर्ट कार्ड के अनुसार 30 80 अंकों की परीक्षा के लिए तैयार किया है, लेकिन फरवरी महीने में आए पत्र में 20 30 अंकों की परीक्षा करवाने के बारे में कहा गया है। इससे विद्यार्थी भी असमंजस में हैं।
लूंगीमामले का संज्ञान : जिलामौलिक शिक्षा अधिकारी परमजीत कौर ने कहा कि रिपोर्ट कार्ड और पत्र में पहली से पांचवीं कक्षा के लिए अलग-अलग अंकों की परीक्षा के आदेशों का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वे मामले का संज्ञान लेंगी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो आला अधिकारियों से बातचीत कर शिक्षकों विद्यार्थियों की उलझन को दूर करवाया जाएगा। ताकि विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा देने में कोई परेशानी हो।
यह है अंकों में अंतर
पहलीदूसरी का प्रश्नपत्र- 30 अंक
तीसरी से पांचवीं का प्रश्नपत्र- 80 अंक
पत्रके अनुसार अंक :
पहलीदूसरी का प्रश्नपत्र- 20 अंक
तीसरी से पांचवीं का प्रश्नपत्र- 30 अंक
498 स्कूलों में 50 हजार विद्यार्थी
उलझन में हैं शिक्षक
राजकीयप्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान विनोद चौहान ने कहा कि शिक्षा विभाग के दो लिखित आदेशों से सभी शिक्षक उलझन में हैं। उन्होंने कहा कि अब सभी शिक्षकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे कितने अंकों के प्रश्नपत्र के हिसाब से विद्यार्थियों की तैयारी करवाएं। शिक्षक सूबे सिंह, विकास, धर्मवीर और संजय ने कहा कि रिपोर्ट कार्ड के अनुसार प्रश्नपत्रों के अंक निर्धारित नहीं किए गए तो रिपोर्ट कार्ड में अंक भी नहीं भरे जा सकेंगे।