मुक्तसर। कंप्यूटर अध्यापक यूनियन की जिला स्तरीय इकाई की ओर से मांगों
के लिए सोमवार की देर शाम जिला शिक्षा अधिकारी दफ्तर के सामने प्रदर्शन
किया गया। इस दौरान कंप्यूटर शिक्षकों ने धक्केशाही के विरोध में सूबा
सरकार के खिलाफ वादाखिलाफी मुहिम के आगाज की घोषणा भी कर दी।
वक्ताओं
ने कहा कि उनकी मांगों संबंधित विभाग की ओर से की जा रही टाल-मटोल की नीति
से दुखी होकर जब यूनियन ने विभाग को आरटीआई डाली तो उसके जवाब में पंजाब
सरकार के प्रसोनल विभाग ने बीते साल 27 दिसंबर कोे पत्र जारी किया गया।
इसके अनुसार शिक्षा विभाग कंप्यूटर अध्यापकों को सूबे का कर्मचारी ही नहीं
मान रहा है।
उक्त पत्र के अनुसार कंप्यूटर अध्यापक राज्य सरकार के नहीं
बल्कि सोसाइटी के कर्मचारी है। नेताओं के अनुसार पंजाब के सरकारी स्कूलों
में बीते 13 सालों से लगातार सेवाएं देने के बावजूद शिक्षा विभाग की पंजाब
आईसीटी सोसाइटी के अधीन कंप्यूटर अध्यापकों पर कोई सर्विस रूल्स लागू नहीं
है। नेताओं ने बताया कि 2005 में कांग्रेस सरकार ने शिक्षा विभाग की पंजाब
आईसीटी सोसाइटी के अधीन कंप्यूटर अध्यापकों की भर्ती की थी।
हालांकि उनकी सेवाओं को देखते हुए साल 2011 में उनको रेगुलर कर दिया गया
था। वहीं नोटिफिकेशन में पंजाब सीएसआर रूल्स के अधीन सेवाएं रेगुलर की गई
थी। वहीं आज तक उक्त नियम लागू न किए जाने से कंप्यूटर अध्यापक आम कर्मियों
की तरह एसीपी, आंतरिक रिलीफ, सीपीएफ कटौती व पंजाब सीएसआर रूल्स की
सहूलियतों से वंचित चले आ रहे थे। इससे सूबेभर में कार्यरत करीब सात हजार
कंप्यूटर अध्यापकों में रोष पाया जा रहा है। इस दौरान नरिंदर खिच्ची, जसपाल
सिंह, हरजीत सिंह, मनजोत सिंह, प्रदीप बेरी, संदीप राजौरिया, राजीव कुमार,
रजनदीप कौर, अनुप्रीत कौर, मीनाक्षी और परमिंदर कौर भी मौजूद थे।
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