शिक्षा विभाग में नए नियुक्त असिस्टेंट ब्लॉक रिसोर्सेस कोऑर्डिनेटर अर्थात
एबीआरसी को शैक्षिक योग्यता के कारण हटाए जाने के आदेश पर पंजाब एंड
हरियाणा उच्च न्यायालय ने यह कहकर रोक लगा दी है कि एमएड की योग्यता एमए के
बराबर क्यों नहीं? 13 मार्च, 2020 काे अगली सुनवाई हाेगी।
हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन के प्रवक्ता विनोद रोहिल्ला ने बताया कि 15 जून, 2019 को एबीआरसी के 1207 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, इसमें प्रथम श्रेणी स्नातकोत्तर की योग्यता को आधार बनाया था और साथ में हिंदी या संस्कृत विषय के साथ मैट्रिक और 12वीं, बीए या एमए हिंदी विषय के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया था। इसमें एमएड पास अभ्यर्थियों का चयन कर दिया था और 11 सितंबर 2019 को ड्यूटी ज्वाॅइन भी कर ली थी। 16 िसतंबर, 2019 विभाग ने इन्हें हटाने का आदेश पारित कर दिया और साथ में यह भी कहा कि एमएड पास को इस पद के लिए ड्यूटी ज्वाॅइन करने के योग्य नहीं माना जाएगा। सविता रानी बनाम हरियाणा सरकार केस में एडवोकेट शैलेंद्र मोहन द्वारा ये याचिका लगाई गई थी कि एमएड की डिग्री स्नातकोत्तर के बराबर है। इसलिए 16 सितंबर, 2019 को पास किए गए उस आदेश को निरस्त किया जाए, जिसमें एबीआरसी की नौकरी के लिए एमएड को अयोग्य मानकर हटाने के आदेश जारी किए थे। याचिका में यह भी अपील की गई है कि एमएड की डिग्री को स्नातकोत्तर के समान माना जाए। हाईकोर्ट ने एमएड को एमए के समान न माने जाने वाले आदेश पर तुरंत रोक लगाते हुए इसे 13 मार्च 2020 को अगली सुनवाई के लिए फिक्स कर दिया।
हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन के प्रवक्ता विनोद रोहिल्ला ने बताया कि 15 जून, 2019 को एबीआरसी के 1207 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, इसमें प्रथम श्रेणी स्नातकोत्तर की योग्यता को आधार बनाया था और साथ में हिंदी या संस्कृत विषय के साथ मैट्रिक और 12वीं, बीए या एमए हिंदी विषय के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया था। इसमें एमएड पास अभ्यर्थियों का चयन कर दिया था और 11 सितंबर 2019 को ड्यूटी ज्वाॅइन भी कर ली थी। 16 िसतंबर, 2019 विभाग ने इन्हें हटाने का आदेश पारित कर दिया और साथ में यह भी कहा कि एमएड पास को इस पद के लिए ड्यूटी ज्वाॅइन करने के योग्य नहीं माना जाएगा। सविता रानी बनाम हरियाणा सरकार केस में एडवोकेट शैलेंद्र मोहन द्वारा ये याचिका लगाई गई थी कि एमएड की डिग्री स्नातकोत्तर के बराबर है। इसलिए 16 सितंबर, 2019 को पास किए गए उस आदेश को निरस्त किया जाए, जिसमें एबीआरसी की नौकरी के लिए एमएड को अयोग्य मानकर हटाने के आदेश जारी किए थे। याचिका में यह भी अपील की गई है कि एमएड की डिग्री को स्नातकोत्तर के समान माना जाए। हाईकोर्ट ने एमएड को एमए के समान न माने जाने वाले आदेश पर तुरंत रोक लगाते हुए इसे 13 मार्च 2020 को अगली सुनवाई के लिए फिक्स कर दिया।