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2012 की भर्ती में चयनित असमंजस में 317 जेबीटी शिक्षक

हिसार, 30 नवंबर अंगूठा और हस्ताक्षर जांच के दौरान तकनीकी खामियों की सजा 2012 की भर्ती में चयनित 317 जेबीटी शिक्षकों को भुगतनी पड़ रही है। रोजगार होते हुए भी ये बेरोजगार बने हुए हैं। इन्होंने अपनी मांगों को लेकर पंचकूला में अनशन शुरू कर दिया है।

तकनीकी खामियों से शिक्षकों की सही जांच नहीं हो पा रही है। इससे केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे डिजिटल इंडिया के दावे हवा होते दिख रहे हैं। इन शिक्षकों को ‘नॉट डेफिनेट’ शब्द ने रोजगार होते हुए भी बेरोजगार बना दिया है। सुनवाई न होने से क्षुब्ध ये शिक्षक अपने रोजगार के लिए नार्को टेस्ट करवाने को भी तैयार हैं, उनको अपने अंगूठे और हस्ताक्षर पर इतना अटूट विश्वास है।
2012 में 9872 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती निकाली गयी थी। कांग्रेस सरकार ने कार्यकाल के अंत में इसका परिणाम घोषित कर दिया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन और मामला कोर्ट में जाने से इनकी नियुक्ति अटक गई।
कोर्ट में इनकी जीत हुई और नियुक्ति भी करवाई गई, लेकिन इनमें से लगभग 317 चयनित शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी मधुबन स्थित स्टेट क्राइम ब्रांच में अंगूठों और हस्ताक्षर की जांच तो की गई, लेकिन जांच करने वाले किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। इसकी वजह तकनीकी खामी बताई गयी है। जांच में इन्हें नॉट डेफिनेट बताया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, ये शिक्षक हो भी सकते हैं और नहीं भी। यानी जांच किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाई। जांच करने वाले न तो इसे गलत ठहरा पाए और न ही सही। जिसका खामियाजा उक्त शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है और रोजगार के लिए संघर्षरत हैं।

क्या कहते हैं शिक्षक

जेबीटी शिक्षकों की हिसार से प्रधान किरण मलिक व रामेहर नारनौंद ने बताया कि सरकार कोई मदद नहीं कर रही है। गलती जांच करने वाली लैब की है और खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

क्या कहते हैं अफसर
एफएसएल निदेशक आरके कौशल ने कहा कि शिक्षकों के अंगूठे और हस्ताक्षर की दोबारा जांच चल रही है। 10 से 15 दिन में जांच पूरी हो जाएगी। अभ्यर्थियों द्वारा ठीक से अंगूठा व हस्ताक्षर न करने से ऐसा होता है।

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