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सरकारी स्कूलों में न शिक्षक, न किताबें, न मिले यूनिफार्म के पैसे

चंडीगढ़ (रोहिला): बच्चों का भविष्य संवारने के लिए चंडीगढ़ में सरकारी स्कूल खोले गए हैं लेकिन बिना यूनिफॉर्म, किताबों व शिक्षकों के भला यह मकसद कैसे पूरा हो सकता है? ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरने की बजाय गिर सकता है।
शहर के सरकारी स्कूल पहले ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। चंडीगढ़ में कांट्रैक्ट पर काम करने वाले लगभग 300 से अधिक जे.बी.टी. टीचर्स की हरियाणा के स्कूलों में रैगुलर टीचर के तौर पर ज्वाइङ्क्षनग होने के बाद यह समस्या और बढ़ गई। सोमवार को यह सभी शिक्षक चंडीगढ़ के स्कूलों से रिलीव होकर हरियाणा में ज्वाइन कर लेंगे। इसका असर सोमवार को स्कूलों में साफ देखने को मिलेगा।

इन शिक्षकों ने वर्ष 2009 में चंडीगढ़ में ज्वाइन किया था। 2014 में इन्होंने हुड्डा सरकार के समय हरियाणा में शिक्षक भर्ती के लिए अप्लाई किया था। सभी को नौकरी मिल भी गई थी लेकिन खट्टर सरकार द्वारा इस भर्ती पर सवालिया निशान लगाते हुए जांच के आदेश दिए थे। मामला कोर्ट में चला गया था। हुड्डा सरकार द्वारा करीब 9455 शिक्षकों की भर्ती की गई थी। हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में इस संबंधी सुनाए गए फैसले में 1164 शिक्षकों को छोड़ बाकी सभी शिक्षकों के हक में फैसला सुना दिया है। यू.टी. कैडर एजुकेशनल यूनियन के प्रधान स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि शहर के सरकारी स्कूलों में पहले 1100 शिक्षकों की कमी है। ऐसे में इन 300 शिक्षकों का भी चले जाने से हालात बिगड़ जाएंगे।


स्टूडैंट्स के मुकाबले टीचर्स कम
चंडीगढ़ जैसे शहर में ऐसे सरकारी स्कूलों की कमी नहीं है जहां एक क्लास में 80-100 स्टूडैंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। राइट टू एजुकेशन एक्ट में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए अहम प्रावधान किए गए हैं। इनमें टीचर्स-स्टूडैंट रेश्यो 1;35 होने की बात भी प्रमुखता से कही गई है। सी.बी.एस.ई. ने भी कई सकुर्लर जारी किए हैं जिसके अनुसार एक क्लास में 40 से अधिक स्टूडैंट्स नहीं होने चाहिए। सरकारी स्कूलों में स्टूडैंट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन टीचर्स के भी कई पद अभी खाली पड़े हुए हैं।



स्थायी भर्ती जरूरी
प्रधान स्वर्ण सिंह कंबोज का कहना है कि सरकारी स्कूलों का रिजल्ट हर साल बेहतर हो रहा है और स्टूडैंट्स की संख्या भी बढ़ रही है। पिछले कुछ सालों के आंकड़ों को देखें तो स्टूडैंट्स की संख्या काफी हद तक बढ़ी है लेकिन स्कूलों में टीचर्स की कमी दूर नहीं हो पाई है। शिक्षा विभाग टीचर्स की कमी को दूर करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स और गैस्ट टीचर की भी नियुक्ति करता है लेकिन जब तक रैगुलर टीचर नियुक्त नहीं होंगे, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।  सरकारी स्कूलों में नए सत्र को शुरू हुए माह बीत चुका है लेकिन अभी तक छात्रों को न तो स्कूल यूनिफार्म के पैसे ही मिल पाए हैं और न ही किताबें। सर्व शिक्षा अभियान का नारा सब पढ़ें, सब बढ़े का नारा सिर्फ नाममात्र का ही नजर आ रहा है। सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के 1 लाख 2 हजार के करीब छात्रों में से कुछ छात्रों के अभिभावकों ने खुद से ही अपने बच्चों के लिए यूनिफार्म खरीदनी पड़ी। 

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