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सरकारी स्कूलों में 'ना' शिक्षक 'ना' पीने का पानी

कहते हैं पढ़ेगा हरियाणा तभी आगे बढ़ेगा हरियाणा, लेकिन कैसे पढ़ेगा हरियाणा? जब किसी स्कूल में तीन सौ छात्र हों और पढ़ाने वाले सिर्फ तीन, तो पढ़ने की कल्पना करना बेइमानी होगी और अगर स्कूल में नौनिहालों को खारा पानी पिलाया जा रहा  हो तो आगे बढ़ने की कल्पना भी बेइमानी ही होगी.

पलवल के टोंका गांव के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में टीचर्स का टोटा है तो होडल के डाडका गांव के मिडल स्कूल में मनोहर के नौनिहाल सुविधाओं को तरस रहे हैं. आलम ये है कि यहां बच्चों को खारा पानी पीना पड़ रहा है.
इस स्कूल  में बच्चों के लिए शौचालय की भी कोई व्यवस्था नहीं है और बच्चों का कहना है कि घरों से पिने का पानी लेकर आते हैं क्योंकि स्कूल में खारा पानी आता है जो पीने लायक नहीं है.
उपमंडल अधिकारी प्रताप  सिंह ने कहा की इस बारे में सरकार के द्वारा निर्देश आ रहे हैं की जहां पर भी इस तरह की पिने के पानी किल्लत है उन जगहों का निरिक्षण करके पानी की किल्लत को दूर किया जाएगा.
वैसे तो शिक्षा के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है. लेकिन ये रुपये ज़मीन निगल जाती है या आसमान क्योंकि हकीकत की धरातल पर स्कूलों की हालत कल भी बदतर थी और आज भी बदतर है.
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