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लड़कियों को कम दाखिला देने वाले स्कूल तलब , लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के कम एडमिशन हुए, मांगा ब्योरा

रोहतक : बेटियों को बचाने और उन्हें पढ़ाने के लिए सरकार की सख्ती काम आने लगी है। शिक्षा विभाग ने ड्रापआउट का ब्यौरा नए तरीके से मांगा है। इसमें लड़कों की अपेक्षा कम लड़कियों को एडमिशन देने वाले स्कूलों का ब्योरा शिक्षा विभाग ने मांगा है। जिन गांवों में लिंगानुपात कम है और ड्रापआउट का भी ब्योरा मांग लिया है। इसमें स्कूल छोड़ने वाली बेटियों पर विभाग ने नजर गढ़ा दी हैं।
ऐसे स्कूलों की रिपोर्ट मांगी है, जिनमें ड्रापआउट सर्वाधिक है और लड़कियों ने ज्यादा स्कूल छोड़ा है। जिन स्कूलों और गांवों में ऐसी समस्याएं हैं, वहां स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल कल्याण विभाग विशेष जागरूकता कैंप लगाएगा।
जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और खंड मौलिक शिक्षा अधिकारियों से तत्काल ही रिपोर्ट देने के आदेश जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता रूहिल ने दिए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि 31 मार्च से लेकर 31 मई तक की रिपोर्ट विभाग ने तलब की है। ड्रापआउट की यूं तो पहले ही रिपोर्ट आई थी, लेकिन रिपोर्ट से अधिकारी ही संतुष्ट नहीं थे। इसलिए फिर से नए सिरे और नए नियमों के साथ ब्योरा मांगा है। जो रिपोर्ट मांगी गई है, उसमें 11वीं और 12वीं में स्कूल छोड़ने वाली छात्रओं पर सर्वाधिक फोकस है। स्कूल छोड़ने के कारणों से लेकर यह रिपोर्ट मांगी है कि किन स्कूलों और गांवों में ऐसी शिकायतें सर्वाधिक हैं। उन गांवों में लिंगानुपात की भी स्थिति की रिपोर्ट भी देनी है। कम लिंगानुपात और कम लड़कियों को एडमिशन वाले गांवों व स्कूलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। जिससे ऐसा होने से रोका जा सके। यदि पिछले साल की बात करें तो लड़कों से करीब सवा से डेढ़ गुना तक अधिक एडमिशन लड़कियों के थे। यहां बता दें कि मौलिक शिक्षा विभाग में आठवीं तक अभी 43801 छात्र-छात्रओं के एडमिशन हो चुके हैं।
"शिक्षा, स्वास्थ्य और बाल कल्याण विभाग संयुक्त तौर से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम चला रहे हैं। इस दफा हमारा पूरा फोक्स है कि लड़कियां पढ़ाई छोड़कर किसी भी सूरत में घर पर न बैठे। सरपंच और मौजिक लोगों की मौजूदगी में चौपाल लगाकर लोगों को बेटियों को पढ़ाने और बचाने के लिए प्रेरित करेंगे।"-- डॉ. दीपा जाखड़, सीएमओ।
"छात्रओं की संख्या का पता करने के लिए हमने रिपोर्ट मांगी है। लिंगानुपात से लेकर अन्य लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के एडमिशन की रिपोर्ट मांगी गई है।"-- सुनीता रूहिल, जिला शिक्षा अधिकारी
कम संख्या क्यों, यह भी देना होगा जवाब

छात्रों की तुलना में छात्रओं को कम एडमिशन दिलाने वाले स्कूलों को इसका कारण भी बताना होगा कि आखिर एडमिशन देने में चूक क्यों हुई। दसवीं के बाद ज्यादा लड़कियां स्कूल छोड़ती हैं, यही कारण है कि 11वीं और 12वीं में लड़कियों के ड्रापआउट की रिपोर्ट तलब की गई है।
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