जिले के सरकारी स्कूलों को राहत प्रदान देते हुए शिक्षा विभाग ने वर्ष 2016
के लिए बिजली बिलों के भुगतान के लिए आवश्यक ग्रांट उपलब्ध करा दी है। इस
ग्रांट से सरकारी स्कूलों के इंचार्ज अपने-अपने स्कूल का बिल भुगतान
करेंगे। जानकारी के अनुसार जिले के प्राइमरी स्कूलों के लिए कुल 11.64 लाख
एवं मिडिल स्कूलों के लिए कुल 3.44 लाख की ग्रांट दी गई है।
शिक्षा विभाग द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार सभी प्राइमरी स्कूलों को पूरे वर्ष के बिजली भुगतान के लिए 3 हजार रुपये एकमुश्त भुगतान के लिए दिए गए हैं तो मिडिल स्कूलों के विभाग ने वार्षिक आधार पर 4 हजार रुपये प्रति स्कूल ग्रांट उपलब्ध कराई है। विभाग द्वारा भेजी गई ये ग्रांट स्कूलों के खाते में पहुंच गई है। बिजली निगम के आंकड़ों की मानें तो जिले में तकरीबन दो दर्जन से अधिक ऐसे स्कूल हैं जिनका बिजली बिल लगातार बकाया चला आ रहा था। विभाग द्वारा जारी गई ग्रांट से बिजली बिल भरा जा सकेगा।
रिपेयरिंग के लिए भी खोला खजाना
बिजली बिलों के साथ साथ जिले के सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग की रिपेयरिंग के लिए भी प्रदेश सरकार ने अपना खजाने का मुंह खोला है। विभाग ने प्राइमरी स्कूलों के लिए 5 हजार रुपये प्रति स्कूल, मिडिल और हाईस्कूलों के लिए 7 हजार रुपये प्रति स्कूल की ग्रांट जारी की है। इस मद में शिक्षा विभाग ने जिले के सभी 388 स्कूलों के लिए 19 लाख 40 हजार एवं मिडिल हाईस्कूलों के लिए 16 लाख 10 हजार की ग्रांट जारी की है।
रखरखाव के लिए भेजे गए 10 लाख नहीं मिले
सरकार की ओर से जिले के 388 प्राइमरी स्कूलों को 2700 रुपये प्रति स्कूल की राशि रखरखाव व अन्य छिटपुट खर्चों के लिए दिए गए। यह राशि आरहण एवं वितरण अधिकारी के खाते में डाली गई है, लेकिन अभी तक ये पैसे प्राइमरी स्कूलों के खाते में नहीं पहुंचे हैं।
प्रति स्कूल 2700 रुपये की राशि प्राइमरी स्कूलों तक अवश्य पहुंचानी होगी। इसकी जिम्मेदारी आहरण एवं वितरण अधिकारी की है।
-कृष्णा सिहाग, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
इस राशि को जारी हुए 3 महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक एक भी स्कूल में पैसे नहीं पहुंचे हैं। प्राइमरी स्कूल हेड को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस राशि को जल्द से जल्द प्राइमरी स्कूलों में वितरित किया जाए।
-विकास टुटेजा, जिलाध्यक्ष, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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शिक्षा विभाग द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार सभी प्राइमरी स्कूलों को पूरे वर्ष के बिजली भुगतान के लिए 3 हजार रुपये एकमुश्त भुगतान के लिए दिए गए हैं तो मिडिल स्कूलों के विभाग ने वार्षिक आधार पर 4 हजार रुपये प्रति स्कूल ग्रांट उपलब्ध कराई है। विभाग द्वारा भेजी गई ये ग्रांट स्कूलों के खाते में पहुंच गई है। बिजली निगम के आंकड़ों की मानें तो जिले में तकरीबन दो दर्जन से अधिक ऐसे स्कूल हैं जिनका बिजली बिल लगातार बकाया चला आ रहा था। विभाग द्वारा जारी गई ग्रांट से बिजली बिल भरा जा सकेगा।
रिपेयरिंग के लिए भी खोला खजाना
बिजली बिलों के साथ साथ जिले के सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग की रिपेयरिंग के लिए भी प्रदेश सरकार ने अपना खजाने का मुंह खोला है। विभाग ने प्राइमरी स्कूलों के लिए 5 हजार रुपये प्रति स्कूल, मिडिल और हाईस्कूलों के लिए 7 हजार रुपये प्रति स्कूल की ग्रांट जारी की है। इस मद में शिक्षा विभाग ने जिले के सभी 388 स्कूलों के लिए 19 लाख 40 हजार एवं मिडिल हाईस्कूलों के लिए 16 लाख 10 हजार की ग्रांट जारी की है।
रखरखाव के लिए भेजे गए 10 लाख नहीं मिले
सरकार की ओर से जिले के 388 प्राइमरी स्कूलों को 2700 रुपये प्रति स्कूल की राशि रखरखाव व अन्य छिटपुट खर्चों के लिए दिए गए। यह राशि आरहण एवं वितरण अधिकारी के खाते में डाली गई है, लेकिन अभी तक ये पैसे प्राइमरी स्कूलों के खाते में नहीं पहुंचे हैं।
प्रति स्कूल 2700 रुपये की राशि प्राइमरी स्कूलों तक अवश्य पहुंचानी होगी। इसकी जिम्मेदारी आहरण एवं वितरण अधिकारी की है।
-कृष्णा सिहाग, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
इस राशि को जारी हुए 3 महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक एक भी स्कूल में पैसे नहीं पहुंचे हैं। प्राइमरी स्कूल हेड को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस राशि को जल्द से जल्द प्राइमरी स्कूलों में वितरित किया जाए।
-विकास टुटेजा, जिलाध्यक्ष, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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