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भर्तियां रद्द, निदेशक नहीं कर पाएंगे ‘ग्रुप-डी’ की नियुक्ति

चंडीगढ़, 2 जनवरी कांट्रेक्ट आधार पर शुरू की गई पहली ही भर्ती विवादों में पड़ने के बाद अब राज्य की खट्टर सरकार ने ग्रुप-सी व डी यानी तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती संबंधित विभागों के निदेशकों एवं बोर्ड-निगमों के प्रबंध निदेशकों से बाहर करने का मन बना लिया है।
सोमवार को नववर्ष और अपनी सरकार का करीब सवा 2 साल का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर चंडीगढ़ में मीडिया से रूबरू हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट‍्टर ने इसके संकेत दिए।
मत्स्य पालन विभाग में हुई फिशरमैन-कम-वाचमैन की भर्ती में भेदभाव व धांधली के तथाकथित आरोपों के चलते सरकार ने यह फैसला लिया है। खट्टर ने कहा, ‘जब यह बात हमारे नोटिस में आई तो यह निर्णय लिया गया कि इस तरह की भर्तियों के लिए नई नीति तय करनी होगी’। कांट्रेक्ट आधार पर होने वाली नियुक्तियों के लिए अब नया फार्मूला तैयार होगा।
इस बीच सीएम ने इस बात की पुष्टि भी कर दी कि मत्स्य पालन विभाग में हुई फिशरमैन-कम-वाचमैन की भर्ती को रद्द कर दिया गया है। यह भर्ती विवादों में पड़ने और मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जाने के बाद विभाग के निदेशक ने खुद ही भर्ती को रद्द करने की सिफारिश की थी। मत्स्य पालन विभाग की इस भर्ती से खुद को पूरी तरह से दूर करते हुए सीएम ने कहा ‘ग्रुप-डी की भर्तियां आमतौर पर संबंधित विभाग के निदेशक के स्तर पर होती हैं। इसमें सरकार की भूमिका नहीं रहती’। हरियाणा लोकसेवा आयोग व हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा की जाने वाली भर्तियों में जरूर सरकार की जिम्मेदारी होती है।
50 हजार पद भरने हैं कांट्रेक्ट आधार पर
याद रहे कि सरकार ने प्रदेशभर में खाली पड़े तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के 50 हजार से अधिक पदों को कांट्रेक्ट आधार पर भरने का फैसला लिया हुआ है। कांट्रेक्ट आधार पर होने वाली इन भर्तियों का क्या प्रारूप होगा और यह भर्तियां कब तक होंगी, इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही इस बारे में नीति तैयार कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि भर्ती चाहे नियमित हो या फिर कांट्रेक्ट आधार पर, सरकार की कोशिश यही रहेगी कि पूरी पारदर्शिता के साथ भर्ती की जाए। पूर्व की सरकार पर भर्तियों में भाई-भतीजावाद व इलाकावाद के आरोप जड़ते हुए सीएम ने कहा ‘जब हमने सत्ता संभाली थी तो सरकारी नौकरियों से युवाओं का विश्वास उठ चुका था। हरियाणा लोकसेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की ओर से अब तक घोषित नतीजों से युवाओं का यह विश्वास बहाल हुआ है और अब उन्हें लग रहा है कि पढ़-लिखकर बिना सिफारिश के नौकरी हासिल की जा सकती है’।

दिव्यांगों, मरीजों को मनचाही पोस्टिंग
प्रदेश में शिक्षकों की ऑनलाइन तबादला नीति के लिए खुद की पीठ थपथपाते हुए सीएम ने कहा कि यह फैसला आज तक कोई सरकार नहीं कर पाई थी। अब दूसरे विभागों में भी ऑनलाइन तबादलों के लिए नीति बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षक अपनी पोस्टिंग के लिए नेताओं व अधिकारियों के चक्कर काटते रहते थे। बदलियाें में पैसा भी चलता था लेकिन अब शिक्षकों को घर बैठे ही उनका मनचाहा स्टेशन मिल रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में कई दिव्यांग व कैंसर पीड़ितों को मनचाहा स्टेशन नहीं मिल सका है लेकिन उन्हें जल्द ही एडजस्ट किया जाएगा। सीएम खट‍्टर ने कहा कि 100 प्रतिशत दिव्यांगों के अलावा कैंसर पीड़ित शिक्षकों को वहीं पोस्टिंग मिलेगी, जहां वे चाहेंगे। इसी तरह से विवाह के बाद बदले हालात के हिसाब से महिलाओं को भी उनकी पसंद का स्टेशन मिलेगा।

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