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आरटीई: 5363 सीटों पर 3274 आवेदन

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम(आरटीई) के तहत आरक्षित सीटों में आवेदन की आखिरी तारीख समाप्त हो चुकी है। इस बीपीएल श्रेणी के बच्चों के 3274 आवेदन जिला शिक्षा विभाग को प्राप्त हुए हैं। जो की पिछली बार की तुलना में दस प्रतिशत कम है।
इस बार सीटों की संख्या के अनुपात में 61 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए हैं। जबकि पिछली बार सीटों के अनुपात में 71 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए थे। जो साबित करता है कि इस बार आरटीई की सीटों में प्रवेश भी पिछली बार की तुलना में कम होंगे। जबकि इस बार एक हजार से ज्यादा सीटें बढ़ गई हैं। पालक इसकी वजह इस बार आवेदन करने कम समय मिलना बता रहे हैं। उनका कहना है कि आवेदन की प्रक्रिया इतनी कठिन है कि उसे पूरा करने में पंद्रह दिन का समय कब निकल गया पता नहीं चला।

उल्लेखनीय है कि प्राईवेट स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों में बीपीएल श्रेणी के बच्चों को एडमिशन देने का प्रावधान आरटीई में रखा गया है। इसे ले कर हर जिला शिक्षा विभाग द्वारा कार्यवाही की जाती है। फिर भी प्राईवेट स्कूलों की बहुत सीटें खाली रह जाती हैं। आरटीई के नियमों को ढाल बना कर प्राईवेट स्कूल गरीब बच्चों को एडमिशन देने से बचने से प्रयास करते हैं और शिक्षा विभाग भी नियमों की आढ़ में स्कूलों पर कोई दबाव नहीं बना पाता है। इस वजह से पिछली बार जिले में 1325 सीटें रिक्त रह गई थीं। आवदेकों की लापरवाही से पिछली बार 1325 सीटें रिक्त रह गई थीं और त्रुटी के कारण 413 फार्म रिजेक्ट हो गए।

आवेदन का मिलेगा मौका

जिन नोडलों में शतप्रतिशत सीटों के आवेदन आए थे वहां भी इस बार तीस प्रतिशत तक कम आवेदन आए। 15 दिन का समय कम होता है आवेदन करने के लिए। आवेदन लेने की तारीख बढ़ाई जाए।नासीर खोखर, अध्यक्ष, दुर्ग भिलाई पालक संघ

ये संख्या अभी और बढ़ेगी

अगर आप देखेंगे तो पिछली बार की तुलना में आवेदन की संख्या बढ़ी है। भले की सीटों के अनुपात में यह कम लग रही है। इसकी वजह इस बार प्रक्रिया जल्दी हो सकती है। अभी दो नोडलों का आवेदन आना बाकी है। इससे भी संख्या बढ़ेगी। अमित घोष, आरटीई प्रभारी, जिला शिक्षा विभाग

कहां कितनी है आरटीई की सीटें

दुर्ग ब्लाक

नर्सरी 2691

केजी वन 456

क्लास वन 929

धमधा ब्लाक

नर्सरी 297

केजी वन 181

क्लास वन 94

पाटन ब्लाक

नर्सरी 9375

केजी वन 209

क्लास वन 715

आवेदनों की संख्या बढ़ी है। एडमिशन भी ज्यादा होंगे 

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