जागरण संवाददाता, रेवाड़ी : किशोरों के सामने आने वाली चुनौतियों और समस्याओं से निपटने तथा ज्ञान और कौशल में विकास के लिए सरकार द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। राजकीय स्कूलों से शिक्षकों को हेल्थ एंड वेलनेस
(स्वास्थ्य एवं स्वच्छता) कार्यक्रम के तहत हेल्थ एंबेसडर बनाया जाएगा। स्कूल के दौरान ही बच्चे किशोर अवस्था में प्रवेश करते हैं। इस दौरान उनके मन में कई प्रकार के प्रश्न और समस्याएं आती हैं, जिनके समाधान के लिए उन्हें उचित मार्गदर्शक की जरूरत होती है। इसलिए सरकार की तरफ से कक्षा छठी से 12वीं तक के स्कूलों के शिक्षकों को हेल्थ एंबेसडर के रुप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे जहां न केवल विद्यार्थियों को विद्यालय में सुरक्षित वातावरण मिलेगा बल्कि समाज में भी सुरक्षित माहौल बनाने में भी मदद मिलेगी।शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के सहयोग से शिक्षकों को 11 विषयों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले के पांचों खंडों से 500 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाना है, जिसमें 244 स्कूल मुखिया शामिल हैं। इनमें से 400 का प्रशिक्षण पूरा भी हो चुका है। वहीं बाकी शिक्षकों को भी जल्द प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण टीम में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) से वरिष्ठ प्रशिक्षक अनिल यादव, दीपक कुमार, संगीता यादव, राज्य संयोजक ब्रह्मप्रकाश यादव, पूनम यादव, डा. अंजू यादव, डा. सरोज यादव शामिल हैं। विद्यार्थियों से चर्चा करेंगे प्रशिक्षित शिक्षकों की ओर से साप्ताहिक या पाक्षिक आधार पर विद्यार्थियों के साथ पारस्परिक संबंध, बेहतर स्वास्थ्य, मूल्य और जिम्मेदार नागरिक, प्रजन्न स्वास्थ्य और एचआइवी की रोकथाम, पोषण स्वास्थ्य और स्वच्छता, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा, भावनात्मक कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य, हिसा के खिलाफ सुरक्षा, लैंगिक समानता, मादक पदार्थों की रोकथाम, इंटरनेट, गैजेट्स और मीडिया के सुरक्षित उपयोग विषयों पर प्रश्न बैंक, रोल प्ले और सामुहिक रूप से चर्चा की जाएगी। वहीं शिक्षकों को अलग से एक रजिस्टर बनाकर इसे दर्ज भी किया जाएगा। जबकि शिक्षकों की ओर से किशोर और किशोरियों की गोपनीयता का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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सरकार द्वारा इस बार शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एकीकृत व्यवस्था की गई है। पहले इन बिदुओं पर अलग-अलग विभागों द्वारा शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन अब विशेषज्ञों की टीम बनाकर एक साथ ही सभी बिदुओं पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- अनिल यादव, वरिष्ठ प्रशिक्षक डाइट
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स्कूली शिक्षा के दौरान विद्यार्थियों के मन में उत्पन्न होने वाले विचारों, चुनौतियों और समस्याओं के समाधान की दिशा में यह एक अच्छा कदम है। इससे न केवल किशोरावस्था के दौरान गलत दिशा में जाने से विद्यार्थियों को रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि स्कूल और समाज में अच्छा वातावरण तैयार होगा।
-दीपक कुमार, प्रवक्ता मनोविज्ञान