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बच्चों का खाता खुलवाने के लिए शिक्षक काट रहे चक्कर

जागरण संवाददाता, रोहतक :
सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के खाते खुलवाने के लिए शिक्षकों को बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कुछ शिक्षक तो पिछले दो महीने से खातों के लिए चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभी तक बच्चों के बैंक खाते नहीं खुले है।
शिक्षकों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी बच्चों के खाते खोलने में आनाकानी कर रहे हैं। बता दें कि सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों को तमाम तरह के वजीफे व अन्य सहायता राशि दी जाती है। लेकिन समय पर बैंक खाता न खुलने से बच्चों को मिलने वाली यह राशि लटक भी सकती है।
शहर के सेक्टर एक स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल के लगभग 15 बच्चों का बैंक खाता करीब दो महीने से नहीं खुल रहा है। ऐसे में एक तरफ जहां उनके अभिभावक परेशान हैं। घडावठी गांव में भी बैंक की ओर से बच्चों के खाते खोलने में आनाकानी का मामला सामने आया है। इस तरह के अनेक मामले सामने आ रहे हैं। बता दें कि सरकार की ओर से बच्चों को दी जाने वाली स्कूल ड्रेस, बैग व अन्य सहायता राशि अब आनलाइन उनके बैंक खातों में ही डाली जाती है।
एक दिन में खुल जाता है खाता
बैंक सूत्रों की मानें तो खाता खुलवाने के लिए लंबा समय नहीं लगता है। बैंक खाता तो एक ही दिन भी खुल जाता है। तमाम प्रक्रिया पूरी होने पर बैंक खाता जल्दी ही शुरू कर दिया जाता है। बैंक खाता खुलवाने के लिए महीने भर चक्कर कटवाना गलत है।
सरकारी स्कूलों के बच्चों के बैंक खाते समय पर खोले जाएं। इसके लिए शिक्षकों के चक्कर कटवाना सही नहीं है। शिक्षकों के बार बार बैंक में चक्कर लगने से एक तरफ जहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं शिक्षक भी परेशान होते हैं। समय पर बैंक खाते खोल कर बैंक भी सरकारी की हिदायत का पालन करें ताकि बच्चों को समय पर सरकारी लाभ प्राप्त को सके।
- रामराज, जिला प्रधान, प्राथमिक शिक्षक संघ ।
बच्चों के बैंक खाते खुलने में देरी होने का यह मामला उनके संज्ञान में अब आया है। सरकारी हिदायत के अनुसार सभी बच्चों के जीरो बैंलेंस से खाते खुलवाए जाएंगे। बैंक खाते खुलवाने को लेकर बच्चों को कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
- एमएस यादव, क्षेत्रीय प्रबंधक, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ।
बच्चों का बैंक खाता जीरो बैलेंस से खोला जाना होता है। इसके लिए सरकारी ने सभी बैंकों को आदेश दिए हुए हैं। बच्चों के बैंक खाते खुलवाने के लिए शिक्षक लिखकर देते हैं। फिर भी अगर कोई बैंक सरकारी स्कूलों के बच्चों के खाते खोलने में आनाकानी कर रहा है तो इस संबंध में जिला उपायुक्त के साथ बैठक में बात की जाएगी। सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए बच्चों के बैंक खाते खुलवाने अनिवार्य है।

- परमेश्वरी हुड्डा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रोहतक।

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