; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Advertisement

सरकारी टीचर्स को अब 45 मिनट ज्यादा करना होगा काम

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : शहर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले करीब पांच हजार टीचर्स के वर्किंग आवर बढ़ाने की तैयारी शिक्षा विभाग ने कर ली है। शिक्षा विभाग ने राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के नियम को लागू करने के लिए वर्किंग आवर बढ़ाने का निर्णय लिया है।

इसके लिए शिक्षा विभाग तैयारी कर चुका है। अब इसे इसी महीने के अंत या फिर जनवरी के पहले सप्ताह में लागू किया जा सकता है। इस नियम के तहत हर टीचर को एक सप्ताह में 45 घंटे स्कूल को देने होंगे। ऐसे में शिक्षकों को हफ्ते में सात घंटे अधिक काम करना होगा। इसमें बच्चों को पढ़ाने के अलावा एक घंटा अतिरिक्त स्कूल के कार्य और अगले दिन पढ़ाने की तैयारी के लिए लगाना होगा।
सरकारी टीचर सप्ताह में करते हैं 39 घंटे काम
अभी सरकारी टीचर्स मात्र 39 घंटे ही स्कूल में देते हैं। शहर के स्कूल गर्मियों में सुबह आठ से दोपहर दो बजे और सर्दियों में साढ़े आठ से ढाई बजे तक खुले रहते हैं। सुबह 15 मिनट पहले और दोपहर को 15 मिनट बाद में देने होते हैं। इस प्रकार से मात्र छह से साढे़ छह घंटे ही टीचर स्कूल में रहते हैं। अब शिक्षा विभाग की तरफ से बनाए नियम के अनुसार टीचर को सुबह 15 मिनट और दोपहर को 45 मिनट ज्यादा देने होंगे।
यह है नया नियम
नए नियम के अनुसार प्राइमरी टीचर को साल में 800 घंटे और अपर प्राइमरी टीचर को 1000 घंटे काम करना होगा। इसमें प्राइमरी टीचर को 200 और अपर प्राइमरी में 220 वर्किंग डे देने होते हैं। इस समय विभाग के पास टीचर्स की कमी है जिसके चलते एक टीचर 236 वर्किंग डे साल में स्कूल को दे रहा है। इसके अलावा इस नियम में समान कार्य, योग्यता और तजुर्बा रखने वाले टीचर को एक समान वेतन देना होगा, लेकिन शहर में टीचर्स के कई स्लैब बने हुए हैं। कांट्रेक्ट, गेस्ट, एसएसए टीचर्स हैं। सभी का पे स्केल अलग-अलग है।
पहले फेल हो चुका है नियम
शिक्षा विभाग राइट टू एजुकेशन के नियम को पहले 2013 में लागू कर चुका है। उस समय सरकारी टीचर्स ने जबदस्त प्रदर्शन किया और विभाग को मात्र दो दिन के भीतर इस आदेश को वापस लेना पड़ा था। उसके बाद अब विभाग चार साल बाद दोबारा से इसे शुरू करने की तैयारी कर चुका है।
आरटीई का कोई भी नियम शिक्षा विभाग लागू करता है तो कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन, उसे पूरी तरह से लागू करने की जरूरत है। पिक एंड चूज का कार्य विभाग को नहीं करना चाहिए। यदि वर्किंग आवर पूरे करने हैं तो बाकी की सुविधाएं भी दें। उसमें समान वेतन, छुट्टी भी देना अनिवार्य है।
- अरविंद राणा, प्रेसिडेंट, सर्व शिक्षा अभियान एसोसिएशन
वर्किंग आवर को बढ़ाने का निर्णय पहले भी लिया गया था। उस समय भी पिक एंड चूज की पॉलिसी अपनाई गई थी जो कि गलत है। यदि अब भी पिक एंड चूज की नीति हुई तो टीचर्स विरोध करेंगे।
- स्वर्ण सिंह कंबोज, प्रेसिडेंट यूटी कैडर एजुकेशन यूनियन
आरटीई के नियम को लागू करने पर विचार किया जा रहा है, जो कि अभी फाइनल नहीं हुआ है। जल्द ही इस पर फैसला होगा।

- अनुजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी 

UPTET news

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();