रेवाड़ी. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन भेजने वाले
शिक्षकों की उम्मीदों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने झटका
दिया है। हर साल 272 या इससे ज्यादा पुरस्कार दिए जाते रहे हैं, मगर इस बार
केवल 45 शिक्षकों को ही इस सम्मान के लायक समझा है।
अवॉर्ड के लिए चयनित शिक्षकों की सूची मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल दी गई है। इसमें हरियाणा से एक शिक्षक का चयन इस अवॉर्ड के लिए हुआ है, जबकि बाकी दो केस रिजेक्ट कर दिए गए। केंद्र सरकार की इस कंजूसी से खफा विभिन्न राज्य के शिक्षकों ने प्रधानमंत्री से राष्ट्रपति तक को पत्र भेजकर रिजेक्ट किए गए केसों पर पुनर्विचार की मांग की है।
153 आवेदन आए थे, 108 रिजेक्ट हो गए
प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिए जाते हैं। इनकी शुरूआत वर्ष 1958 में की गई थी। हमेशा से ही सम्मान पाने वाले शिक्षकों की संख्या सैकडों में रही है। शुरूआती दौर में ही केंद्र ने राज्यों से 272 केस मांगे थे। इसके बाद से संख्या कुछ बढ़ती-घटती रही है। वर्ष 2014 में 325 शिक्षकों को यह सम्मान मिला, जबकि वर्ष 2017 में 374 केस मांगे थे, मगर क्राइटेरिया पूरा करने वाले 280 शिक्षकों की ही फाइल भेजी गई। इनमें से एक भी शिक्षक के नाम में कटौती नहीं हुई तथा सरकार ने सभी 280 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा था। इस बार 153 केस ही राज्यों से मांगे गए। ये केस राज्यों से तो भेज दिए गए, एमएचआरडी द्वारा इनमें 108 केस रिजेक्ट कर दिए तथा केवल 45 को अवॉर्ड के लिए चुना गया है। 16 अगस्त को एनसीईआरटी में प्रेजेंटेशन के बाद 24 अगस्त को सूची जारी की गई है।
आईएएस की कमेटी से 100 अंक मिले, मगर काम नहीं आए
हरियाणा से 3 नाम भेजे गए थे, जिनमें दो शिक्षक रेवाड़ी से हैं। वर्ष 2017 के राज्य शिक्षक पुरस्कार विजेता गणित अध्यापक संजय कुमार गुप्ता और 2013 के अवॉर्डी इतिहास प्रवक्ता डॉ. लक्ष्मीनारायण तथा एक शिक्षक मेवात से बसरूद्दीन के केस राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए भेजे गए। इनमें केवल बसरूद्दीन खान का चयन राष्ट्रीय अवार्ड के लिए हुआ है। शिक्षक संजय गुप्ता और डॉ. लक्ष्मीनारायण का कहना है कि ब्लॉक से राष्ट्रीय स्तर तक 5 बाधाओं को पार कर उनके केस मंत्रालय तक पहुंचते हैं। राज्य स्तर पर आईएएस अफसरों की कमेटी वेरिफाई करती है। यहां उन्हें निर्धारित क्राइटेरिया के अनुसार 100 में से 100 अंक मिले। ऐसे में मंत्रालय में उनके नाम कैसे सूची से बाहर हो गए, ये हैरानी की बात है।
अवॉर्ड के लिए इनके नाम सूची में शामिल
सीबीएसई, सिक्किम, तेलंगाना व कर्नाटक से 3-3, पंजाब, राजस्थान, केरला, गुजरात व छत्तीसगढ़ से दो-दो शिक्षकों का चयन हुआ है। इसके अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, बिहार, दिल्ली, असम, मनीपुर, झारखंड, हिमाचल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, नागालैंड, केंद्रीय विद्यालय, दादरा नगर हवेली, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, सीआईएसई, त्रिपुरा व मिजोरम से एक-एक शिक्षक को अवॉर्ड दिया जाएगा।
सरकार करे पुनर्विचार
रेवाड़ी के शिक्षकों के साथ ही उड़ीसा से तन्मय सान्याल, दिल्ली से बलवान सिंह, जम्मू कश्मीर से चरण प्रीत कौर व चंडीगढ़ से राजेंद्र सिंह ने एमएचआरडी मंत्री, पीएम नरेंद्र मोदी व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र भेजकर पुनर्विचार की मांग की है। इनका कहना है कि पूरे देश से राजकीय, सीबीएसई, नवोदय, सैनिक व मिलिट्री स्कूलों तक के शिक्षक आवेदन करते हैं। शिक्षकों की संख्या बढ़ी है, तो फिर अवॉर्ड संख्या घटाने का क्या औचित्य।
अवॉर्ड के लिए चयनित शिक्षकों की सूची मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल दी गई है। इसमें हरियाणा से एक शिक्षक का चयन इस अवॉर्ड के लिए हुआ है, जबकि बाकी दो केस रिजेक्ट कर दिए गए। केंद्र सरकार की इस कंजूसी से खफा विभिन्न राज्य के शिक्षकों ने प्रधानमंत्री से राष्ट्रपति तक को पत्र भेजकर रिजेक्ट किए गए केसों पर पुनर्विचार की मांग की है।
153 आवेदन आए थे, 108 रिजेक्ट हो गए
प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिए जाते हैं। इनकी शुरूआत वर्ष 1958 में की गई थी। हमेशा से ही सम्मान पाने वाले शिक्षकों की संख्या सैकडों में रही है। शुरूआती दौर में ही केंद्र ने राज्यों से 272 केस मांगे थे। इसके बाद से संख्या कुछ बढ़ती-घटती रही है। वर्ष 2014 में 325 शिक्षकों को यह सम्मान मिला, जबकि वर्ष 2017 में 374 केस मांगे थे, मगर क्राइटेरिया पूरा करने वाले 280 शिक्षकों की ही फाइल भेजी गई। इनमें से एक भी शिक्षक के नाम में कटौती नहीं हुई तथा सरकार ने सभी 280 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा था। इस बार 153 केस ही राज्यों से मांगे गए। ये केस राज्यों से तो भेज दिए गए, एमएचआरडी द्वारा इनमें 108 केस रिजेक्ट कर दिए तथा केवल 45 को अवॉर्ड के लिए चुना गया है। 16 अगस्त को एनसीईआरटी में प्रेजेंटेशन के बाद 24 अगस्त को सूची जारी की गई है।
आईएएस की कमेटी से 100 अंक मिले, मगर काम नहीं आए
हरियाणा से 3 नाम भेजे गए थे, जिनमें दो शिक्षक रेवाड़ी से हैं। वर्ष 2017 के राज्य शिक्षक पुरस्कार विजेता गणित अध्यापक संजय कुमार गुप्ता और 2013 के अवॉर्डी इतिहास प्रवक्ता डॉ. लक्ष्मीनारायण तथा एक शिक्षक मेवात से बसरूद्दीन के केस राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए भेजे गए। इनमें केवल बसरूद्दीन खान का चयन राष्ट्रीय अवार्ड के लिए हुआ है। शिक्षक संजय गुप्ता और डॉ. लक्ष्मीनारायण का कहना है कि ब्लॉक से राष्ट्रीय स्तर तक 5 बाधाओं को पार कर उनके केस मंत्रालय तक पहुंचते हैं। राज्य स्तर पर आईएएस अफसरों की कमेटी वेरिफाई करती है। यहां उन्हें निर्धारित क्राइटेरिया के अनुसार 100 में से 100 अंक मिले। ऐसे में मंत्रालय में उनके नाम कैसे सूची से बाहर हो गए, ये हैरानी की बात है।
अवॉर्ड के लिए इनके नाम सूची में शामिल
सीबीएसई, सिक्किम, तेलंगाना व कर्नाटक से 3-3, पंजाब, राजस्थान, केरला, गुजरात व छत्तीसगढ़ से दो-दो शिक्षकों का चयन हुआ है। इसके अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, बिहार, दिल्ली, असम, मनीपुर, झारखंड, हिमाचल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, नागालैंड, केंद्रीय विद्यालय, दादरा नगर हवेली, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, सीआईएसई, त्रिपुरा व मिजोरम से एक-एक शिक्षक को अवॉर्ड दिया जाएगा।
सरकार करे पुनर्विचार
रेवाड़ी के शिक्षकों के साथ ही उड़ीसा से तन्मय सान्याल, दिल्ली से बलवान सिंह, जम्मू कश्मीर से चरण प्रीत कौर व चंडीगढ़ से राजेंद्र सिंह ने एमएचआरडी मंत्री, पीएम नरेंद्र मोदी व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र भेजकर पुनर्विचार की मांग की है। इनका कहना है कि पूरे देश से राजकीय, सीबीएसई, नवोदय, सैनिक व मिलिट्री स्कूलों तक के शिक्षक आवेदन करते हैं। शिक्षकों की संख्या बढ़ी है, तो फिर अवॉर्ड संख्या घटाने का क्या औचित्य।