NewDelhi : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission)ने कहा है कि राज्य स्तरीय और निजी विश्वविद्यालयों में 80 हजार शिक्षक फर्जी हैं, वे सिर्फ कागजों पर काम कर रहे हैं.
भाषा के अनुसार वर्ष 2016-17 के सर्वे से सामने आये आंकड़ों के आधार पर राज्य और निजी विश्वविद्यालयों के उच्च शिक्षण संस्थानों में जगह पाये इन प्रतिनिधि शिक्षकों को बाहर निकालने के लिए राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं. यह जानकारी UGC के चेयरमैन प्रो धीरेंद्र पाल सिंह ने यहां दी. चेयरमैन पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विवि एवं गौ अनुसंधान संस्थान के आठवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बेाल रहे थे.
उऩ्होंने कहा कि जिस प्रकार अब तक प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षण संस्थाओं में फर्जी शिक्षकों की भर्ती की शिकायतें मिलती रही हैं, उसी प्रकार उच्च शिक्षा में भी अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण 2016-17 में 80 हजार से अधिक प्रॉक्सी टीचर्स की जानकारी मिली है. कहा कि इनसे छुटकारा पाने के लिए राज्यों को विशेष निर्देश जारी कर उनके आधार कार्ड आदि ठोस पहचान पत्रों के आधार पर उनकी पहचान करने को कहा गया है और उऩ्हें सिस्टम से निकाल बाहर करने की जरूरत है. इस बात की पुष्टि राज्यपाल राम नाईक ने भी पत्रकारों से बातचीत के क्रम में की.
इस क्रम में प्रो सिंह ने उच्च शिक्षा का स्तर एवं गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए आयोग द्वारा की गयी अन्य पहल के बारे में भी जानकारी दी. बताया कि अब भर्ती प्रक्रिया पूरी कर नये शिक्षण संस्थानों में शिक्षक बनने वाले अभ्यर्थियों को भी पहले एक महीने खुद विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करना जरूरी होगा. जिससे वे खुद भी क्षेत्र एवं विषय-विशेष के बारे में पढ़ाने में पूर्ण सक्षम होकर अपडेट हो जायें. चेयरमैन ने बताया कि जो विश्वविद्यालय पिछले कई सालों में गुणवत्ता के मामले में अव्वल आये हैं उनका अपग्रेडेश किया जायेगा और उन्हें स्वायत्तता देने में पहल की जायेगी.
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