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CTET : कई सवालों के जवाब भावी शिक्षकों के मुताबिक सही नहीं

केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के जरिए अपने शिक्षक बनने के सपने को पूरा करने की ख्वाहिश रखने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों को सीबीएसई ने परीक्षा परिणाम घोषित करने से पहले ही झटका दे दिया है। बोर्ड की ओर से जो आंसर की जारी की गई है उसमें कई सवालों के जवाब भावी शिक्षकों के मुताबिक सही नहीं है।
जिससे उन्हें डर है कि यदि मौजूदा आंसर की को ही यदि आधार बनाकर मार्किंग की गई तो उन्हें परीक्षा में काफी नुकसान हो सकता है। क्योंकि यहां एक-दो नंबरों का अंतर भी उन्हें क्वालीफाई करने से रोक सकता है। यही कारण है कि उसे बाकायदा चैलेंज भी किया गया है। सीटेट की परीक्षा 9 दिसंबर को आयोजित की गई थी। जिसमें सोनीपत के भी करीब दस हजार से ज्यादा कैंडिडेट्स ने सीटेट की परीक्षा दी थी।

सफल होने पर यहां बन सकते हैं शिक्षक : कैंडिडेट्स सीटेट की पहले पेपर में सफल होंगे वे पहली से पांचवीं क्लास के टीचर बनने के योग्य होंगे, जबकि जो कैंडिडेट्स दूसरे पेपर में सफल होंगे उन्हें छठीं से आठवीं क्लास के लिए होने वाली शिक्षक भर्ती के योग्य माना जाएगा। यहां सफलता के बाद केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सर्वोदय स्कूल केंद्रीय तिब्बत स्कूल और सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की पात्रता मिल जाती है। यही नहीं अच्छे प्राइवेट स्कूलों में भी सीटीईटी की डिमांड है।


आंसर-की को चैलेंज आसान नहीं

परीक्षा में बैठे विद्यार्थियों के मुताबिक बोर्ड की आंसर की को चैलेंज करना आसान नहीं है। क्योंकि चैलेंज के लिए जहां प्रति सवाल विद्यार्थी को एक हजार रुपए खर्च करने हैं तो वहीं वह आधार भी साथ ही देना है जिसके मुताबिक उन्हें लगता है कि यह आंसर की गलत है। यहां बड़ी बात यह है कि यदि आंसर की में विद्यार्थी का चैलेंज सही साबित होता है तो उन्हें एक हजार रुपए रिफंड भी किए जाएंगे। बावजूद इसके एक हजार रुपए को ज्यादा बताने वाले विद्यार्थियों ने समूह बनाकर रुपए शेयरिंग कर एक विद्यार्थी के माध्यम चैलेंज किया।

विद्यार्थी बोले रिवाइज आंसर की हो जारी : परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों आकांक्षा, शिल्पी, नुपूर, अंकित व रोहन ने सीबीएसई से रिवाइज आंसर की जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही कहा है कि आंसर की के लिए जो चैलेंज फीस तय की गई है उसे भी कम किया जाए। इस संदर्भ में कोचिंग सेंटर संचालक इन्द्रजीत पराशर ने बताया कि विद्यार्थियों पर यह अतिरिक्त बोझ है, जिसमें उन्हें राहत मिलनी ही चाहिए।

विद्यार्थियों के मुताबिक ये जवाब आंसर में गलत

पहला उदाहरण


यहां आंसर की में जवाब मिथक बताया गया जबकि चैलेंज के मुताबिक जवाब रूढ़ीबद्ध धारणा है।

दूसरा उदाहरण


इसमें आंसर की में जवाब जहां एनसीएफ 1975 दिया गया तो चैलेंज के मुताबिक जवाब 2005 सही है।

तीसरा उदाहरण


इसमें जहां चैलेंज में जवाब बच्चों को सीखने की जरूरत को जानने में और तदनुसार शिक्षक रणनीति का चयन करने में दिया गया तो वहीं सीबीएसई के मुताबिक जवाब बच्चों की प्रगति और उपलब्धि स्तर को जानने में था। 

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