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...जब शिक्षक करेंगे अन्य काम तो कैसे आएंगे बेहतर परिणाम, बच्चों की पढ़ाई भी हो रही प्रभावित

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग शहर के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से विद्यार्थियों को पढ़ाने के अलावा अन्य सारे काम ले रहा है। 16 से 21 दिसंबर तक फिट इंडिया वीक की गतिविधियां भी आयोजित करवाई गई। वहीं पीसा का पेपर भी इसी हफ्ते करवाया गया। 19 दिसंबर से शिक्षकों की चाइल्ड मैपिंग में ड्यूटी लगी हुई है।
9वीं से 12वीं तक के बच्चों के पेपर जांच कर उनका रिजल्ट भी मंगलवार को देना है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि शिक्षक कैसे बच्चों के पेपर जांच कर रिजल्ट तैयार करें और रेगुलर चल रही कक्षाओं में बच्चों के लेक्चर भी लें।
सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकारी स्कूलों का रिजल्ट भी प्राइवेट की तुलना में बेहतर करने का है। शहर के सरकारी स्कूलों में बच्चों के शैक्षिक स्तर को सुधारने के लिए शिक्षा विभाग रोजाना कोई ना कोई बैठक करता रहता है। लेकिन ग्राउंड पर स्कूलों की हालत इसके एकदम विपरीत है। एक तो पहले ही सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी चल रही है, दूसरी तरफ जो शिक्षक स्कूलों में हैं उनकी गैर शैक्षणिक कामों में ड्यूटी लगा दी जाती है। ऐसे में शिक्षक बच्चों की कब क्लासें लेंगे ? कैसे विद्यार्थियों पर अलग से ध्यान देंगे जिससे कमजोर बच्चों की मदद की जा सके, यह समझ से परे है।

सरकारी स्कूल के एक हेडमास्टर ने बताया कि 9वीं से 12वीं तक के बच्चों की परीक्षा 2 दिसंबर से 18 दिसंबर तक चली। इसी बीच 16 दिसंबर से 21 दिसंबर तक फिट इंडिया वीक मनाया गया, जिसमें प्रार्थना सभा में योगा, व्यायाम, प्राणायाम आदि  गतिविधियां करवानी थी। इसके अलावा बच्चों में डिबेट, सेमीनार, स्पोर्ट्स एक्सपर्ट की तरफ से लेक्चर, रंगोली प्रतियोगिता, कविता-निबंध लेखन, डांस, मार्शल आर्ट, रस्सी-कूद, गार्डनिंग, स्पोर्ट्स क्विज, बच्चों-परिजनों-शिक्षकों में पारंपरिक खेलों को लेकर प्रतियोगिताएं इत्यादि आयोजित करवाई गई।

इन सभी गतिविधियों की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी फोटो के साथ क्लस्टर हेड को 23 दिसंबर तक ई-मेल करनी थी। 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के पेपर जांच कर उनका रिजल्ट भी 24 दिसंबर तक देना है। इसी बीच पीसा का पेपर भी लिया गया, उसका भी रिजल्ट तैयार कर विभाग को भेजना है। वहीं 19 दिसंबर से स्कूलों में शिक्षकों की चाइल्ड मैपिंग सर्वे में भी ड्यूटी लगा दी गई है। इसका भी रिपोर्ट आगामी हफ्ते में विभाग को भेजनी है। ऐसे में कक्षाओं में शिक्षक नहीं होने के कारण दिसंबर में बच्चे भी कम आए हैं।

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