जागरण संवाददाता, यमुनानगर : सरकारी स्कूलों में व्यवस्था बीमार है। कहीं पढ़ाने के लिए अध्यापक नहीं है तो कहीं बैठने के लिए कमरों का अभाव है। ऐसी स्थिति में न केवल सरकार के दावों की पोल खुल रही है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है।
खंड रादौर के गांव उन्हेड़ी और बरेहड़ी के राजकीय माध्यमिक स्कूल इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। उन्हेड़ी में छठी से आठवीं तक के बच्चों का भविष्य के शिक्षक के कंधों पर है। केवल एक शिक्षक है, वह भी डेपूटेशन पर आया हुआ है। बरेहड़ी की यदि बात की जाए तो मिडल का दर्जा मिले पांच वर्ष बीत गए हैं, लेकिन आज तक भवन नसीब नहीं हुआ। पहले से ही कमरों की तंगी झेल रहे प्राइमरी स्कूल में मिडल की कक्षाएं चल रही हैं। एक कमरे में दो-दो कक्षाओं के बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद कैसे की जा सकती है, इस बात का अंदाजा सहज की लगाया जा सकता है।
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सरकार नहीं गंभीर
राजकीय माध्यमिक स्कूल उन्हेड़ी की एसएमसी के प्रधान सुमेर चंद सैनी का कहना है कि स्कूल में अध्यापकों की व्यवस्था की मांग को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर शिक्षा मंत्री तक को मांगपत्र दिया जा चुका है, लेकिन आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। बीते वर्ष छठी से आठवीं तक केवल एक अध्यापक है जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बीते वर्ष बच्चों की कुल संख्या 152 थी जो इस बार घटकर 102 रह गई है। शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए सरकार भी गंभीर दिखाई नहीं दे रही है। चार वर्ष से स्थिति यही बनी हुई, लेकिन आज तक अध्यापकों की व्यवस्था नहीं हो पाई।
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कमरे तीन और कक्षाएं आठ
राजकीय माध्यमिक स्कूल बरेहड़ी। कहने को माध्यमिक अवश्य है, लेकिन सुविधाएं प्राइमरी स्तर की नहीं हैं। आठवीं कक्षा तक के बच्चों के बैठने के लिए केवल तीन कमरे हैं। 2011 में मिडल का दर्जा तो मिल गया, लेकिन सरकार कमरों की व्यवस्था करवाना भूल गई। अब मिडल ¨वग में 54 बच्चे हैं, लेकिन अलग से भवन न होने के कारण प्राइमरी स्कूल में ही बिठाना मजबूरी है। इतना ही नहीं मैथ व साइंस विषय का टीचर भी नहीं है। अब जहां हालात ऐसे हों, तो वहां शिक्षा का स्तर सुधरने की उम्मीद भला कैसे की जा सकती है?
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सरकारी स्कूलों में पढ़ते गरीब बच्चे
भारतीय किसान संघ के जिला प्रधान रामबीर ¨सह चौहान का कहना है कि सरकारी स्कूलों में गरीब परिवारों की बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। गरीब अभिभावक निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए नहीं भेज सकते है, लेकिन हैरानी की बात है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार, सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापक व बैठने के लिए कमरों तक की व्यवस्था नहीं करा पा रही है। जिला स्तर पर अधिकारी भी स्कूलों का दौरा कर कमियों को दूर करवाने की जहमत नहीं उठाते।
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शिक्षा मंत्री को पत्र लिखेंगे
बच्चों के भविष्य के लिए स्कूल में अध्यापकों की व्यवस्था करना जरूरी है। अध्यापकों की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री को पत्र लिखेंगे। यदि समस्या का हल नहीं हुआ तो पंचायत प्रतिनिधि चंडीगढ़ जाकर उनसे व्यक्तिगत तौर पर मिलेंगे। प्रयास रहेगा कि नए शैक्षणिक सत्र में अध्यापकों की व्यवस्था करवाई जाए।
पूनम, सरपंच, उन्हेड़ी।
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उन्हेड़ी में अध्यापकों व बरेहड़ी गांव में कमरों की कमी का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अध्यापकों की व्यवस्था सरकार अपने स्तर पर करवा रही है। रही बात भवन की, इस ओर भी ध्यान दिया जाएगा।
उदय प्रताप ¨सह, जिला शिक्षा अधिकारी।
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