चंडीगढ़, [वेब डेस्क]। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की खंडपीठ ने ओमपकाश
चौटाला के शासनकाल साल में भर्ती किए गए 3206 जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति
के मामले में फैसला देने से इन्कार कर दिया। हाई कोर्ट की एकल ने इन
शिक्षकों की नियुक्ति को खारिज कर दिया था। शिक्षकों ने इसे खंडपीठ में
चुनौती दी थी। खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करने के बाद 2 जून को फैसला सुरक्षित
रख लिया था।
इस शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2000 में हुई थी अौर इसी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र अजय चौटाला तिहाड़ जेल में बंद हैं। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इन शिक्षकों की नियुक्तियों को गलत करार देते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद, प्रभावित श्ािक्षकों ने खंडपीठ में अपील की थी।
खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला 2 जून को फैसला सुरक्षित रखा था। बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने इस मामले पर फैसला देने से इंकार करते हुए मामला अन्य पीठ को रेफेर कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले में आठ मीडिया हाउस ( दैनिक जागरण नहीं ) को इस मामले में गलत समाचर प्रकाशित करने पर आपराधिक अवमानना नोटिस जारी चुकी है। इसी कारण से वह इस मामले ये खुद को अलग कर रही है।
इस मामले में अब का घटनाक्रम
-5 जून 2003 ( हरियाणा के आईएएस अधिकारी संजीव कुमार अब निलंबित और दस साल कैद की सजा प्राप्त) राज्य में 3,206 जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार और रिकॉर्डों में हेरफेर की शिकायत लेकर उच्चतम न्यायालय गए।
-25 नवंबर 2003 : उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।
-12 दिसंबर 2003 : सीबीआई ने प्रारंभिक जांच दर्ज की।
-24 मई 2004 : सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत 62 लोगों के खिलाफ नियमित आधार पर मामला दर्ज किया।
-मई 2004-2008 : सीबीआई जांच में पाया गया कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पी चौटाला, उनके बड़े पुत्र अजय चौटाला, संजीव कुमार और अन्य लोग इस मामले में संलिप्त थे।
-6 जून 2008 : सीबीआई ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश की अदालत में चौटाला पिता-पुत्रों, तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार, ओ पी चौटाला के पूर्व ओएसडी विद्याधर (दोनों आईएएस अधिकारी) और ओपी चौटाला के पूर्व राजनीतिक सलाहाकार शेर सिंह बडशामी समेत कुल 62 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया।
- 4 अगस्त, 2012 : बचाव पक्ष की गवाही पूरी हुई।
-17 दिसंबर 2012 : मामले की बहस समाप्त हुई। सुनवाई के दौरान छह आरोपियों ( शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों : की मौत हो गई और मामले के आरोपियों की संख्या 55 रह गई।
- 16 जनवरी 2013 : अदालत ने चौटाला पिता-पुत्र और 53 अन्यों को दोषी ठहराया।
- 22 जनवरी 2013 : चौटाला पिता-पुत्र, संजीव कुमार और सात अन्य को 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई। मामले में 44 दोषियों को चार साल और एक को 5 साल कारावास की सजा सुनाई गई।
-7 फरवरी 2013 : ओ पी चौटाला उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय गए।
-11 जुलाई 2014 : उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।
-5 मार्च 2015 : उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। उसने चौटाला पिता-पुत्र और तीन अन्य को 10 वर्ष के कारावास और अन्य 50 दोषियों की सजा में बदलाव करके उन्हें दो वर्ष कारावास की सजा सुनाई।
- 8 जनवरी 2014 : 3206 जेबीटी की नियुक्ति पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की एकल पीठ ने रद कर दी।
-जनवरी 2014 में ही अलग-अलग याचिकाएं दायर कर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की एकल पीठ के फैसले को प्रभावित शिक्षकों ने खंडपीठ में चुनौती दी।
- 2 जून 2016 : खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा।
-14 जुलाई 2016 : खंडपीठ ने नियुक्ति रद करने के मामले में फैसला देने से किसा इनकार। मामला अन्य पीठ को किया रेफर।
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इस शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2000 में हुई थी अौर इसी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके पुत्र अजय चौटाला तिहाड़ जेल में बंद हैं। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इन शिक्षकों की नियुक्तियों को गलत करार देते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद, प्रभावित श्ािक्षकों ने खंडपीठ में अपील की थी।
खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला 2 जून को फैसला सुरक्षित रखा था। बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने इस मामले पर फैसला देने से इंकार करते हुए मामला अन्य पीठ को रेफेर कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले में आठ मीडिया हाउस ( दैनिक जागरण नहीं ) को इस मामले में गलत समाचर प्रकाशित करने पर आपराधिक अवमानना नोटिस जारी चुकी है। इसी कारण से वह इस मामले ये खुद को अलग कर रही है।
इस मामले में अब का घटनाक्रम
-5 जून 2003 ( हरियाणा के आईएएस अधिकारी संजीव कुमार अब निलंबित और दस साल कैद की सजा प्राप्त) राज्य में 3,206 जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार और रिकॉर्डों में हेरफेर की शिकायत लेकर उच्चतम न्यायालय गए।
-25 नवंबर 2003 : उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।
-12 दिसंबर 2003 : सीबीआई ने प्रारंभिक जांच दर्ज की।
-24 मई 2004 : सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत 62 लोगों के खिलाफ नियमित आधार पर मामला दर्ज किया।
-मई 2004-2008 : सीबीआई जांच में पाया गया कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पी चौटाला, उनके बड़े पुत्र अजय चौटाला, संजीव कुमार और अन्य लोग इस मामले में संलिप्त थे।
-6 जून 2008 : सीबीआई ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश की अदालत में चौटाला पिता-पुत्रों, तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार, ओ पी चौटाला के पूर्व ओएसडी विद्याधर (दोनों आईएएस अधिकारी) और ओपी चौटाला के पूर्व राजनीतिक सलाहाकार शेर सिंह बडशामी समेत कुल 62 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया।
- 4 अगस्त, 2012 : बचाव पक्ष की गवाही पूरी हुई।
-17 दिसंबर 2012 : मामले की बहस समाप्त हुई। सुनवाई के दौरान छह आरोपियों ( शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों : की मौत हो गई और मामले के आरोपियों की संख्या 55 रह गई।
- 16 जनवरी 2013 : अदालत ने चौटाला पिता-पुत्र और 53 अन्यों को दोषी ठहराया।
- 22 जनवरी 2013 : चौटाला पिता-पुत्र, संजीव कुमार और सात अन्य को 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई। मामले में 44 दोषियों को चार साल और एक को 5 साल कारावास की सजा सुनाई गई।
-7 फरवरी 2013 : ओ पी चौटाला उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय गए।
-11 जुलाई 2014 : उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।
-5 मार्च 2015 : उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। उसने चौटाला पिता-पुत्र और तीन अन्य को 10 वर्ष के कारावास और अन्य 50 दोषियों की सजा में बदलाव करके उन्हें दो वर्ष कारावास की सजा सुनाई।
- 8 जनवरी 2014 : 3206 जेबीटी की नियुक्ति पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की एकल पीठ ने रद कर दी।
-जनवरी 2014 में ही अलग-अलग याचिकाएं दायर कर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की एकल पीठ के फैसले को प्रभावित शिक्षकों ने खंडपीठ में चुनौती दी।
- 2 जून 2016 : खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा।
-14 जुलाई 2016 : खंडपीठ ने नियुक्ति रद करने के मामले में फैसला देने से किसा इनकार। मामला अन्य पीठ को किया रेफर।
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