सरकार की शिक्षक
ट्रांसफर पॉलिसी बीरबल की खिचड़ी बनती जा रही है। पीजीटी को अपनी च्वाइस
के स्टेशन भरने के लिए फिर से दो दिन का समय बढ़ा दिया गया है। अब वे 15
जुलाई रात 11 बजकर 51 मिनट तक अपने मनपसंदीदा स्टेशन भर सकेंगे।
हरियाणा सरकार ने शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादले करने के लिए जोन वाइज ट्रांसफर करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह पालिसी अधिकतर शिक्षकों को पसंद आई। सबसे पहले पीजीटी पर अपनाई गई। उन्हें अपनी पसंद के स्टेशन भरने के लिए चार से सात जुलाई का समय दिया गया था। लेकिन पोर्टल खुलने के कारण इसे बढ़ाकर 11 जुलाई कर दिया गया। यहां भी बात नहीं बनी तो इस तारीख को 13 तक बढ़ा दिया गया। कयास लगाए जा रहे थे कि 15 जुलाई को सीएम मनोहर लाल खट्टर ट्रांसफर पॉलिसी लागू कर देंगे। लेकिन 13 जुलाई शाम को ही संदेश गया कि पीजीटी को अपनी पसंद के स्टेशन भरने के लिए दो दिन का समय बढ़ा दिया गया है।
हसलाने हटवाएं कैप्ट वेकेंट स्कूल: शिक्षाविभाग के अधिकारियों ने करीब 25 प्रतिशत स्कूलों को खाली रखने का मन बना लिया था। शिक्षकों ने अंदेशा जताया था कि इन्हें मंत्री या राजनीति पहुंच वालों से भरा जाएगा। इस पर हसला ने कड़ा रूख अपनाते हुए निदेशक शिक्षा मंत्री से बातचीत की। इस के बाद ही अधिकांश कैप्ट वेकेंट स्कूलों को ट्रांसफर के लिए रिक्त दर्शाया गया। हसला के जिला प्रधान वेदपाल ने बताया कि यूनियन के आब्जेक्शन उठाने पर ही इन स्टेशनों को ओपन किया गया। हालांकि फिलहाल भी कुछ एक स्टेशन कैप्ट वेकेंट रखे गए है।
पढ़ाईभी हो रही प्रभावित : अधिकतरशिक्षकों को अपनी ट्रांसफर की चिंता सता रही है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का पूरा माहौल खराब हो गया है। हर किसी को यही सोचता है कि कहां का स्टेशन मिलेगा। शिक्षकों ने एक मन बना लिया है कि अब वे नए स्टेशन में नए बच्चों को ही पढ़ाएंगे। वे जहां पढ़ा रहे हैं वहां दूसरे ही शिक्षक आकर सेलेबस पूरा करेंगे। जुलाई का आधा महीना बीत गया। इन दिनों में स्कूलों में सेलेबस का एक या दो पाठ भी नहीं पढ़ाया गया।
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हसलाने हटवाएं कैप्ट वेकेंट स्कूल: शिक्षाविभाग के अधिकारियों ने करीब 25 प्रतिशत स्कूलों को खाली रखने का मन बना लिया था। शिक्षकों ने अंदेशा जताया था कि इन्हें मंत्री या राजनीति पहुंच वालों से भरा जाएगा। इस पर हसला ने कड़ा रूख अपनाते हुए निदेशक शिक्षा मंत्री से बातचीत की। इस के बाद ही अधिकांश कैप्ट वेकेंट स्कूलों को ट्रांसफर के लिए रिक्त दर्शाया गया। हसला के जिला प्रधान वेदपाल ने बताया कि यूनियन के आब्जेक्शन उठाने पर ही इन स्टेशनों को ओपन किया गया। हालांकि फिलहाल भी कुछ एक स्टेशन कैप्ट वेकेंट रखे गए है।
पढ़ाईभी हो रही प्रभावित : अधिकतरशिक्षकों को अपनी ट्रांसफर की चिंता सता रही है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का पूरा माहौल खराब हो गया है। हर किसी को यही सोचता है कि कहां का स्टेशन मिलेगा। शिक्षकों ने एक मन बना लिया है कि अब वे नए स्टेशन में नए बच्चों को ही पढ़ाएंगे। वे जहां पढ़ा रहे हैं वहां दूसरे ही शिक्षक आकर सेलेबस पूरा करेंगे। जुलाई का आधा महीना बीत गया। इन दिनों में स्कूलों में सेलेबस का एक या दो पाठ भी नहीं पढ़ाया गया।
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