पीजीआईके बेहोशी विभाग में मशीनों की ही कमी नहीं, बल्कि मरीजों को संभालने
वाले स्टाफ का भी टोटा है। संस्थान के विभिन्न ऑपरेशन थिएटरों में रोजाना
आने वाले मरीजों के लिए महज सात सीनियर रेजिडेंट हैं। यहां 56 में से 49 पद
रिक्त पड़े हैं। इस वजह से मरीजों को बेहोश होने के लिए 15 से 30 दिन तक
इंतजार करना पड़ता है।
यही नहीं विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों का भी अभाव है। यह काम फिलहाल 16 शिक्षकों के जिम्मे है। ऐसे में विभाग का शैक्षणिक शोध संबंधी काम भी सवालों के घेरे में खड़ा है। इस बारे में संस्थान के अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
संस्थान के बेहोशी (एनेस्थिसिया) विभाग में कहने को सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के 56 पद स्वीकृत हैं, जबकि इनमें से 49 पद अरसे से रिक्त पड़े हैं। इस कारण सारा काम यहां के सात एसआर को संभालना पड़ रहा है। संस्थान की करीब 16 ऑपरेशन टेबल पर औसतन 50 ऑपरेशन होते हैं। ऐसे में एक एसआर के हिस्से करीब सात से आठ मरीज आते हैं। इन्हें पहले बेहोशी की पर्याप्त मात्रा में दवा देकर ऑपरेशन के लिए तैयार करने के अलावा बाद में दवा के असर से बाहर आने तक उनकी देखभाल करनी होती है।
फैकल्टी के भी 54 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 38 पद रिक्त हैं। इस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई कराने, परीक्षा लेने उत्तर पुस्तिका जांचने जैसे सभी काम महम 16 शिक्षकों पर निर्भर है। इसके अलावा सीनियर होने के नाते थियेटर में भी जिम्मेदारी संभालनी होती है। ऐसे में संस्थान के विद्यार्थियों की पढ़ाई जैसे तैसे ही चल पा रही है। यही नहीं वर्कलोड के कारण शिक्षक शोध की ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
जल्दहोगी भर्ती : डॉ. प्रशांत कुमार
^संस्थानमें डॉक्टरों के पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसमें से एनेस्थिसिया विभाग के लिए करीब 54 पद सीनियर रेजिडेंट 38 फैकल्टी के हैं। विभाग में काफी पद रिक्त हैं। इस कारण मौजूदा स्टाफ पर वर्कलोड है। -डॉ. प्रशांत कुमार, प्रवक्ता, पीजीआईएमएस।
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यही नहीं विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों का भी अभाव है। यह काम फिलहाल 16 शिक्षकों के जिम्मे है। ऐसे में विभाग का शैक्षणिक शोध संबंधी काम भी सवालों के घेरे में खड़ा है। इस बारे में संस्थान के अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
संस्थान के बेहोशी (एनेस्थिसिया) विभाग में कहने को सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के 56 पद स्वीकृत हैं, जबकि इनमें से 49 पद अरसे से रिक्त पड़े हैं। इस कारण सारा काम यहां के सात एसआर को संभालना पड़ रहा है। संस्थान की करीब 16 ऑपरेशन टेबल पर औसतन 50 ऑपरेशन होते हैं। ऐसे में एक एसआर के हिस्से करीब सात से आठ मरीज आते हैं। इन्हें पहले बेहोशी की पर्याप्त मात्रा में दवा देकर ऑपरेशन के लिए तैयार करने के अलावा बाद में दवा के असर से बाहर आने तक उनकी देखभाल करनी होती है।
फैकल्टी के भी 54 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 38 पद रिक्त हैं। इस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई कराने, परीक्षा लेने उत्तर पुस्तिका जांचने जैसे सभी काम महम 16 शिक्षकों पर निर्भर है। इसके अलावा सीनियर होने के नाते थियेटर में भी जिम्मेदारी संभालनी होती है। ऐसे में संस्थान के विद्यार्थियों की पढ़ाई जैसे तैसे ही चल पा रही है। यही नहीं वर्कलोड के कारण शिक्षक शोध की ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
जल्दहोगी भर्ती : डॉ. प्रशांत कुमार
^संस्थानमें डॉक्टरों के पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसमें से एनेस्थिसिया विभाग के लिए करीब 54 पद सीनियर रेजिडेंट 38 फैकल्टी के हैं। विभाग में काफी पद रिक्त हैं। इस कारण मौजूदा स्टाफ पर वर्कलोड है। -डॉ. प्रशांत कुमार, प्रवक्ता, पीजीआईएमएस।
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