पावर नहीं लेने की जिद में फंसा दर्जनों का वेतन
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद डीडीओ की जिद के चलते दो स्कूलों के अध्यापकों सहित दर्जनों कर्मचारी पिछले दो माह से वेतन के इंतजार में बैठे हैं। मामला जिले के गांव भट्टू खुर्द और नखाटिया गांव के सरकारी स्कूलों का है।
इन स्कूलों की डीडी पावर अहसीलदर स्कूल के प्रिंसिपल एके बोहरा के पास है। दरअसल, बोहरा को इन स्कूलों की डीडी पावर उनकी इच्छा के विरुद्ध दी गई है लेकिन विभाग के अधिकारियों की मानें तो नियमानुसार बोहरा को ही डीडी पावर दी जा सकती थी। अब डीडी पावर को मुसीबत समझ रहे एके बोहरा इससे जान छुड़ाने की जुगत में पिछले दो माह से अपनी इस पावर का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे। हालांकि उनकी ये जिद दोनों स्कूलों के अध्यापकों सहित दर्जनों कर्मचारियों की जेब पर भारी पड़ती जा रही है। इन दोनों स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापक, सफाई कर्मचारी, कुक, चपरासी आदि कार्यरत हैं।
स्कूलों में स्थायी इंचार्ज नहीं होने से शिक्षा विभाग को स्कूल से जुड़े खर्चों को चलाने के लिए किसी ना किसी स्कूल के प्रिंसिपल को इन स्कूलों का कार्यभार देना अनिवार्य था। अधिकारियों ने इन दोनों स्कूलों का कार्यभार एके बोहरा को थमा तो दिया लेकिन दोबारा मुड़कर इन स्कूलों की सुध तक नहीं ली। अब इन स्कूलों के कर्मचारियों ने दबी जुबान में प्रिंसिपल बोहरा की जिद के आगे आवाज उठाना शुरू किया है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर स्कूल के एक दर्जन कर्मचारियों ने मीडिया को बताया कि अगर 28 अक्तूबर तक उनकी तनख्वाह ना निकली तो उनकी दीवाली भी काली हो जाएगी। कर्मचारियों ने तो यहां तक कहा है कि अगर उनकी तनख्वाह जल्द नहीं निकाली गई तो इसकी शिकायत सीएम विंडो में भी की जाएगी।
मैंने पहले ही कह दिया था डीडी पावर किसी और को दे दिया जाए
इस बारे में बात करने पर प्राचार्य एके बोहरा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि दस साल से उनके पास डीडी पावर है। इन स्कूलों के अध्यापक आपस में झगड़े करते हैं, इसलिए मैंने अप्रैल में ही मौखिक रूप से डीडी पावर छोड़ दी थी। लेकिन बाद में अध्यापकों ने फिर से उन्हें डीडी पावर दिलवा दी। मैंने विभाग को सूचित कर दिया है कि वे इस स्थिति में काम नहीं कर सकते, इसलिए डीडी पावर किसी और को दे दी जाए।
डीईओ को दी जाएगी मामले की सूचना
इस बारे में बात करने पर खंड शिक्षा अधिकारी कुलदीप सिहाग ने कहा कि उन्होंने एके बोहरा से कहा है कि एक बार तो वे कर्मचारियों की तनख्वाह निकलवा दें। उनकी इच्छा नहीं है तो अगली बार किसी और को डीडी पावर दे देंगे। यदि इसके बाद भी बोहरा तनख्वाह नहीं निकलवाते तो डीईओ को मामले की सूचना दी जाएगी।
यदि बिना मर्जी के पावर दी गई है तो बात कर मुद्दे को सुलझाएं
कुछ स्कूलों में डीडीओ की ओर से स्कूल स्टाफ को सैलरी नहीं निकलवाकर देने का आरोप लगा है। ये गलत परंपरा है। अगर डीडीओ की मर्जी के बिना विभाग ने उन्हें दूसरे स्कूलों की डीडी पावर दे दी है तो उन्हें विभाग से लिखित में बात कर इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए। अध्यापकों या अन्य कर्मचारियों की तनख्वाह ना निकलवाना इसका समाधान नहीं है। त्योहारी सीजन है, हरेक के त्यौहार को लेकर सपने होते हैं, उन सपनों को तोड़ना किसी के लिए ठीक नहीं।
-शमशेर सिंह दहिया, संरक्षक, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, फतेहाबाद।
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अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद डीडीओ की जिद के चलते दो स्कूलों के अध्यापकों सहित दर्जनों कर्मचारी पिछले दो माह से वेतन के इंतजार में बैठे हैं। मामला जिले के गांव भट्टू खुर्द और नखाटिया गांव के सरकारी स्कूलों का है।
इन स्कूलों की डीडी पावर अहसीलदर स्कूल के प्रिंसिपल एके बोहरा के पास है। दरअसल, बोहरा को इन स्कूलों की डीडी पावर उनकी इच्छा के विरुद्ध दी गई है लेकिन विभाग के अधिकारियों की मानें तो नियमानुसार बोहरा को ही डीडी पावर दी जा सकती थी। अब डीडी पावर को मुसीबत समझ रहे एके बोहरा इससे जान छुड़ाने की जुगत में पिछले दो माह से अपनी इस पावर का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे। हालांकि उनकी ये जिद दोनों स्कूलों के अध्यापकों सहित दर्जनों कर्मचारियों की जेब पर भारी पड़ती जा रही है। इन दोनों स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापक, सफाई कर्मचारी, कुक, चपरासी आदि कार्यरत हैं।
स्कूलों में स्थायी इंचार्ज नहीं होने से शिक्षा विभाग को स्कूल से जुड़े खर्चों को चलाने के लिए किसी ना किसी स्कूल के प्रिंसिपल को इन स्कूलों का कार्यभार देना अनिवार्य था। अधिकारियों ने इन दोनों स्कूलों का कार्यभार एके बोहरा को थमा तो दिया लेकिन दोबारा मुड़कर इन स्कूलों की सुध तक नहीं ली। अब इन स्कूलों के कर्मचारियों ने दबी जुबान में प्रिंसिपल बोहरा की जिद के आगे आवाज उठाना शुरू किया है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर स्कूल के एक दर्जन कर्मचारियों ने मीडिया को बताया कि अगर 28 अक्तूबर तक उनकी तनख्वाह ना निकली तो उनकी दीवाली भी काली हो जाएगी। कर्मचारियों ने तो यहां तक कहा है कि अगर उनकी तनख्वाह जल्द नहीं निकाली गई तो इसकी शिकायत सीएम विंडो में भी की जाएगी।
मैंने पहले ही कह दिया था डीडी पावर किसी और को दे दिया जाए
इस बारे में बात करने पर प्राचार्य एके बोहरा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि दस साल से उनके पास डीडी पावर है। इन स्कूलों के अध्यापक आपस में झगड़े करते हैं, इसलिए मैंने अप्रैल में ही मौखिक रूप से डीडी पावर छोड़ दी थी। लेकिन बाद में अध्यापकों ने फिर से उन्हें डीडी पावर दिलवा दी। मैंने विभाग को सूचित कर दिया है कि वे इस स्थिति में काम नहीं कर सकते, इसलिए डीडी पावर किसी और को दे दी जाए।
डीईओ को दी जाएगी मामले की सूचना
इस बारे में बात करने पर खंड शिक्षा अधिकारी कुलदीप सिहाग ने कहा कि उन्होंने एके बोहरा से कहा है कि एक बार तो वे कर्मचारियों की तनख्वाह निकलवा दें। उनकी इच्छा नहीं है तो अगली बार किसी और को डीडी पावर दे देंगे। यदि इसके बाद भी बोहरा तनख्वाह नहीं निकलवाते तो डीईओ को मामले की सूचना दी जाएगी।
यदि बिना मर्जी के पावर दी गई है तो बात कर मुद्दे को सुलझाएं
कुछ स्कूलों में डीडीओ की ओर से स्कूल स्टाफ को सैलरी नहीं निकलवाकर देने का आरोप लगा है। ये गलत परंपरा है। अगर डीडीओ की मर्जी के बिना विभाग ने उन्हें दूसरे स्कूलों की डीडी पावर दे दी है तो उन्हें विभाग से लिखित में बात कर इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए। अध्यापकों या अन्य कर्मचारियों की तनख्वाह ना निकलवाना इसका समाधान नहीं है। त्योहारी सीजन है, हरेक के त्यौहार को लेकर सपने होते हैं, उन सपनों को तोड़ना किसी के लिए ठीक नहीं।
-शमशेर सिंह दहिया, संरक्षक, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, फतेहाबाद।
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