; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Advertisement

सातवें वेतन आयोग से हकेंवि के शिक्षक संतुष्ट नहीं

संवाद सहयोगी, महेंद्रगढ़ : मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा बृहस्पतिवार को प्रसारित विश्वविद्यालय शिक्षकों के वेतनक्रम संशोधन के संदर्भ में हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय शैक्षिक संघ द्वारा आपातकालीन बैठक आयोजित की गई।
इसमें व्यापक विचार विमर्श के उपरान्त यह माना गया कि सातवें वेतन आयोग द्वारा वेतन संशोधन आदेश में सहायक आचार्यो के सन्दर्भ में न्यायसंगत संशोधन नहीं किया गया है। संघ ने मांग की है कि मंत्रालय इस संदर्भ में संज्ञान लेते हुए जल्द राहत का मार्ग प्रशस्त करें।
संघ के सदस्यों ने इस आपात बैठक में चर्चा के दौरान नए वेतनक्रम संशोधन में व्याप्त खामियों पर विस्तार से बात की। इसमें मुख्य रूप से वर्ष 2006 और 1996 के वेतन संशोधनों का उल्लेख करते हुए सदस्यों ने कहा कि इन दोनों ही वेतन संशोधनों में केंद्र सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया गया था कि एमफिल और पीएचडी धारकों को नियुक्ति के साथ ही अतिरिक्त 3 से 5 वेतन वृद्धियां देय होंगी। शिक्षकों ने बताया कि केंद्र द्वारा आयोजित इस प्रोत्साहन योजना ने बड़ी संख्या में लोगों को अन्य नौकरियों के स्थान पर विश्वविद्यालय शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया।
इस वेतन संशोधन में इस तरह की किसी भी वेतनवृद्धि की व्यवस्था को समाप्त किए जाने के प्रति संघ के सदस्यों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की और तत्काल प्रभाव से इस प्रोत्साहन योजना को पुन: लागू करने का आह्वान किया। साथ ही समन्वित रूप से सभी अध्यापकों के लिए इंडेक्स ऑफ रेशनलाइजेशन को 2.72 करने का आह्वान किया गया। सदस्यों ने व्यावसायिक आवश्यकता को देखते हुए यह भी अनुभव किया कि शिक्षकों के लिए प्रतिमाह एक निश्चित स्टेशनरी भत्ता दिया जाना आवश्यक है। साथ ही केंद्र सरकार के डिजिटलाइजेशन अभियान और शैक्षिक अधिगम में आइसीटी के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए शिक्षकों को कंप्यूटर क्रय के लिए सहायता प्रदान करने की भी मांग मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की गई।
शैक्षिक संघ की बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि इस विज्ञप्ति के साथ कैरियर एडवान्स स्कीम की योजना का संलग्न न होना अध्यापकों में कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है। बैठक में एक मत से यह स्वीकार किया गया कि इस तरह की किन्हीं भी समितियों में सहायक और सह आचार्यो को सम्मिलित न किया जाना शिक्षकों के एक बड़े वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह को दर्शाता है। बैठक में विभागाध्यक्ष, डीन जैसे पदों पर कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष कार्यभार भत्ता और टेलीफोन भत्ते के न होने के प्रति भी क्षोभ व्यक्त किया गया।

विश्वविद्यालयों में रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति के लिए कोई ठोस योजना न होने के प्रति भी सदस्यों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। बैठक में संघ के अध्यक्ष विनय कुमार राव, प्रो. सतीश कुमार, डॉ. राघवेन्द्र प्रताप ¨सह, डॉ. नरेश वर्मा, डॉ. प्रमोद जोशी, डॉ. अभिरंजन कुमार, डॉ. जितेन्द्र सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

UPTET news

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();