जालंधर (कमल किशोर) : कई राजनेता, खिलाड़ी, डॉक्टर, इंजीनियरिंग, उद्यमी
देने वाले एडिड स्कूलों का भविष्य खतरे में है। जिले के एडिड स्कूलों में
60 प्रतिशत पद शिक्षकों के खाली है। इन स्कूलों व स्टाफ सदस्यों को शिक्षा
विभाग में मर्ज किए जाने की माग काफी सालों से उठ रही हैं।
एडिड स्कूलों का
आलम यह है कि एक शिक्षक कई विषयों को पढ़ा रहा है। शिक्षकों की भर्ती न
होने की वजह से मैनेजमेंट कमेटी पीटीए फंड से शिक्षक की भर्ती कर रहे है।
कमेटी इन शिक्षकों को 2500 से 5500 रुपए का भुगतान कर रही है।
एडिड स्कूलों की मौजूदा स्थिति की बात करें तो जिले में 50 स्कूल है।
वर्ष 2003 में 1250 शिक्षकों के पद थे। अब 450 शिक्षकों के पद रह गए हैं।
तीन वर्ष पहले सरकार ने एडेड स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती खोल दी थी।
एडेड मैनेजमेंट कमेटी को नई भर्ती प्रक्त्रिया को नकार दिया था। नई पालिसी
के मुताबिक मैनेजमेंट कमेटी ने 30 प्रतिशत हिस्सेदारी देगी और सरकार 70
प्रतिशत हिस्सेदारी देगी। जबकि वर्ष 2003 से शिक्षकों की भर्ती में सरकार
की 95 प्रतिशत ग्राट व पाच प्रतिशत एडेड स्कूल मैनेजमेंट कमेटी डालती थी।
इन स्कूलों में 15000 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे है। इन स्कूलों में
पढ़ चुके हैं राजनेता, डॉक्टर व खिलाड़ी
साईदास स्कूल से पूर्व सीपीएस केडी भंडारी, शिव ज्योति स्कूल के एमडी
सुविक्रम ज्योति, सिविल सर्जन फिरोजपुर गुरमिंदर सिंह, पूर्व कैबीनेट
मंत्री मनोरंजन कालिया, डॉ. सतीश शर्मा, डॉ. कमल गुप्ता, डॉ. राजिंदर
वर्मा, साईंदास स्कूल से डॉ. पसरीचा, सनातन धर्म स्कूल से नीमा पंजाब के
प्रधान डा. परविंदर बजाज, सिविल अस्पताल के रिटायर्ड एसएमओ डा. एमबी बाली,
हवेली के एमडी सतीश जैन, साईदास स्कूल से क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ, टेबल
टेनिस खिलाड़ी गगन बाहरी, केंद्रीय राज्य मंत्री विजय सापला पब्लिक सीनियर
सेकेंडरी स्कूल, कुक्कड़ पिंड, पार्षद कमलजीत सिंह गाधी, पार्षद भागवंत
प्रभाकर से पढ़ चुके हैं।
एडेड स्कूल टीचर्स यूनियन के प्रधान सदस्य अरविंद नागपाल ने कहा कि
एडेड स्कूलों के साथ सरकार द्वारा सौतेल व्यवहार कर रही है। सरकार को एडेड
स्कूलों के शिक्षकों को सरकारी स्कूलों मर्ज करने की बात कही थी। इससे
सरकारी स्कूलों में खाली पड़े पद भर जाएंगे। सरकार की ओर एडेड स्कूलों के
विद्यार्थियों को मेरिटोरियस स्कूलों में दाखिला नहीं मिलता। फ्री वर्दिया
नहीं मिलती।
पूर्व सीपीएस केडी भंडारी ने कहा कि तीस वर्ष पहले एडिड स्कूल ही होते
थे। शिक्षा का बुनियादी ढाचा सही करने के लिए शिक्षकों की भर्ती खोलनी
चाहिए। मुलाजिमों की मागों को नजरअंदाज न किया जाए।
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