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शिक्षकों की नियुक्ति में शिक्षा विभाग की ओर से बड़ा बदलाव , इस रिपोर्ट के आधार पर शिक्षकों के तबादले आदि किए जाएंगे

कैथल. राजकीय स्कूलों के शिक्षकों की नियुक्ति में शिक्षा विभाग की ओर से बड़ा बदलाव किया है। शिक्षा विभाग ने अपनी रेशनेलाइजेशन नीति में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत अब 25 नहीं बल्कि 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी।
लॉकडाउन के समय में राजकीय स्कूलों में दाखिलों को लेकर पहले ही संकट चल रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या शिक्षकों का भविष्य तय करेगी। विभाग ने इस संदर्भ में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी कर सभी स्कूलों की छात्र संख्या और उसमें तैनात स्टाफ की जानकारी मांगी है। इसपर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने सभी बीईओ से रिपोर्ट देने को कहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर शिक्षकों के तबादले आदि किए जाएंगे।
  • इस तरह की होगी नई व्यवस्था | प्राथमिक कक्षाओं में पहले 26वें छात्र और मिडल कक्षाओं में 36वें छात्र पर दूसरा सेक्शन बनाया जाता था। वहीं अब 31वें और 41वें छात्र पर नया सेक्शन बनाया जाएगा। इस हिसाब से शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से 30 सितंबर 2019 की छात्र संख्या के आधार पर रिपोर्ट मांगी गई है । 30 सितंबर 2019 को दर्ज छात्रों की संख्या के आधार पर जेबीटी, टीजीटी अध्यापकों को शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए मौलिक शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों से विवरण मांगा है। पहली से पांचवी के शिक्षक यानी जेबीटी को 1 से 30 छात्रों पर और छठी से आठवीं तक यानी टीजीटी को एक से 40 छात्रों पर शिफ्ट किया जाएगा।
  • बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद होंगे सरप्लस| राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान राजेंद्र टंडन और प्रेस सचिव सूबे सिंह सुजान ने कहा कि शिक्षा विभाग की ओर से किए जा रहे बदलाव से बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद सरप्लस हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि 2017 में जेबीटी जॉइनिंग के दौरान 25 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक को नियुक्ति दी गई थी। वहीं नई शिक्षा नीति में भी 25 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की बात है। ऐसे में शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षक-छात्र अनुपात को बढ़ाना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने बताया कि इस नई नीति के विरोध में सोमवार को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को शिक्षामंत्री व सीएम के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। वहीं इस मामले को लेकर शिक्षामंत्री से भी बातचीत की गई है और इस नीति को वापस लेने की मांग की है। सूबे सिंह सुजान ने कहा कि जिले में 70 से अधिक प्राथमिक स्कूलों पर इस नीति का प्रभाव पड़ेगा। वहीं प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान राजपाल कालड़ा ने कहा कि शिक्षा विभाग अपनी इस नीति को तुरंत रद्द करे।
 जल्द भेजी जाएगी मौलिक शिक्षा निदेशक को रिपोर्ट : भट्‌टी
कुरुक्षेत्र के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतनाम भट्टी ने बताया कि मौलिक शिक्षा निदेशक की ओर से 30 छात्रों पर एक शिक्षक नियुक्त करने को लेकर 31 मई तक रिपोर्ट मांगी गई थी। इसपर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आते ही तुरंत निदेशक कार्यालय में भेज दी जाएगी। फिलहाल इससे कितने शिक्षक सरप्लस होंगे यह नहीं कहा जा सकता। भट्टी ने कहा कि उनसे निदेशालय ने जो रिपोर्ट मांगी है, वह दी जा रही है।

ऐसे होंगे शिक्षकों के तबादले 
पॉलिसी के तहत दिव्यांग और कैंसर पीड़ित शिक्षकों का तबादला नहीं किया जाएगा। वहीं लंबे समय से बीमार शिक्षक का भी तबादला नहीं होगा। किसी भी मुख्य शिक्षक, मौलिक मुख्य अध्यापक को सरप्लस नहीं माना जाएगा। इसके अलावा जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में एक साल या इससे कम का समय है उन्हें भी सरप्लस नहीं किया जाएगा। स्कूल में सबसे लंबी सेवा वाले अध्यापकों को सरप्लस माना जाएगा और सभी जेबीटी अध्यापक सरप्लस हैं तो उस स्थिति में सभी जेबीटी को सरप्लस घोषित किया जाएगा और दूसरे जिलों में भेजा जाएगा। किसी स्कूल में गेस्ट टीचर सरप्लस नहीं है तो नियमित जेबीटी को सरप्लस किया जाएगा। इतना ही नहीं मौलिक मुख्य अध्यापक के भी एक दिन में छह पीरियड होंगे।

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