जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : प्रदेश सरकार ने पीजी की पदोन्नति में
उसी विषय की स्नातकोत्तर की शर्त क्या लगाई गुरुजी चारों खाने चित हो गए।
पहले बीएड कर शिक्षकों ने विद्यार्थियों को शिक्षित किया और बाद में जो
फंसी उसी विषय में प्राइवेट स्नातकोत्तर भी कर डाली। अब शिक्षकों के सामने
समस्या खड़ी हो गई है कि जिस विषय को वे वर्षो से पढ़ा रहे हैं, उस विषय की
तो स्नातकोत्तर की डिग्री उसके पास है ही नहीं।
ऐसे में प्रदेश शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों की पदोन्नति न करने का फरमान भी सुना दिया, हालांकि एसोसिएशन का दबाव बनाकर कुछ शिक्षक जुगाड़ लगाने में लगे हैं कि जैसे-तैसे सरकार माने, लेकिन कुछ शिक्षकों ने इसके लिए दोबारा विश्वविद्यालयों की ओर भी रुख कर लिया है। उसके लिए शिक्षक मोटा जुर्माना भी देने को तैयार हैं। प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं गणित की स्नातकोत्तर की पढ़ाई प्राइवेट नहीं की जा सकती, जिससे बीएससी कर विज्ञान एवं गणित विषय के शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है, क्योंकि वे नौकरी के साथ विज्ञान एवं गणित में स्नातकोत्तर नहीं कर पाएं।
प्रदेश सरकार की ओर से टीजीटी को पीजीटी के पदों पर पदोन्नति देनी शुरू तो कर दी, लेकिन इसमें एक पेंच फंसा दिया। इस बार उन्हीं विषयों पर शिक्षकों की पदोन्नति करने का निर्णय लिया गया है, जो विषय वे टीजीटी में पढ़ा रहे हैं, उसी विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री भी शिक्षकों से मांगी गई है। ऐसे में शिक्षक अब फंस गए हैं, क्योंकि जब शिक्षकों ने ज्वाइन किया था, तब उस समय वे या तो पीजी ही नहीं थे और अगर थे भी तो अन्य विषय में। कुछ शिक्षक ही इस नियम में खरे पाए गए और अधिकतर टीजीटी शिक्षकों का पदोन्नति पाने का सपना अब सपना ही रह गया है, लेकिन गुरुजी हार मानते नहीं दिख रहे हैं। इस शर्त को पूरा करने के लिए शिक्षकों ने विश्वविद्यालयों की ओर रुख करना भी शुरू कर दिया। इस बार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भी ऐसे शिक्षकों की कमी नहीं है, जो पदोन्नति के लिए स्नातकोत्तर करना चाहते हैं।
एक साल बचाने के लिए लगा रहे जुगाड़
कई शिक्षक एक वर्ष बचाने के जुगाड़ में हैं। इस समय कुवि की ओर से स्नातकोत्तर की परीक्षाओं की तैयारी चल रही हैं। परीक्षा में कुछ ही समय शेष बचा है। कुवि की ओर से कुछ समय पहले तक मोटा जुर्माना लगाकर आवेदन करने की अनुमति दी थी। फीस भले ही लगभग 12 सौ रुपये हो, लेकिन जुर्माना मार्च और अप्रैल तक आठ से नौ हजार रुपये तक पहुंच जाता है। उसमें प्रशासन की अनुमति अलग से। ऐसे में गुरुजी के पास कोई चारा नहीं बचा है। शिक्षकों ने इस बार कुवि में मोटे जुर्माने पर प्राइवेट आवेदन भी किया है। हालांकि कुछ शिक्षक समय की नजाकत को पहले ही भांप गए थे और उन्होंने पिछले वर्ष दिसंबर या फिर इस वर्ष जनवरी में ही आवेदन भी कर दिया था। मई में परीक्षा होगी तो एक वर्ष का कार्य एक माह में ही पूरा हो जाएगा।
Sponsored link :
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
ऐसे में प्रदेश शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों की पदोन्नति न करने का फरमान भी सुना दिया, हालांकि एसोसिएशन का दबाव बनाकर कुछ शिक्षक जुगाड़ लगाने में लगे हैं कि जैसे-तैसे सरकार माने, लेकिन कुछ शिक्षकों ने इसके लिए दोबारा विश्वविद्यालयों की ओर भी रुख कर लिया है। उसके लिए शिक्षक मोटा जुर्माना भी देने को तैयार हैं। प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं गणित की स्नातकोत्तर की पढ़ाई प्राइवेट नहीं की जा सकती, जिससे बीएससी कर विज्ञान एवं गणित विषय के शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है, क्योंकि वे नौकरी के साथ विज्ञान एवं गणित में स्नातकोत्तर नहीं कर पाएं।
प्रदेश सरकार की ओर से टीजीटी को पीजीटी के पदों पर पदोन्नति देनी शुरू तो कर दी, लेकिन इसमें एक पेंच फंसा दिया। इस बार उन्हीं विषयों पर शिक्षकों की पदोन्नति करने का निर्णय लिया गया है, जो विषय वे टीजीटी में पढ़ा रहे हैं, उसी विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री भी शिक्षकों से मांगी गई है। ऐसे में शिक्षक अब फंस गए हैं, क्योंकि जब शिक्षकों ने ज्वाइन किया था, तब उस समय वे या तो पीजी ही नहीं थे और अगर थे भी तो अन्य विषय में। कुछ शिक्षक ही इस नियम में खरे पाए गए और अधिकतर टीजीटी शिक्षकों का पदोन्नति पाने का सपना अब सपना ही रह गया है, लेकिन गुरुजी हार मानते नहीं दिख रहे हैं। इस शर्त को पूरा करने के लिए शिक्षकों ने विश्वविद्यालयों की ओर रुख करना भी शुरू कर दिया। इस बार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भी ऐसे शिक्षकों की कमी नहीं है, जो पदोन्नति के लिए स्नातकोत्तर करना चाहते हैं।
एक साल बचाने के लिए लगा रहे जुगाड़
कई शिक्षक एक वर्ष बचाने के जुगाड़ में हैं। इस समय कुवि की ओर से स्नातकोत्तर की परीक्षाओं की तैयारी चल रही हैं। परीक्षा में कुछ ही समय शेष बचा है। कुवि की ओर से कुछ समय पहले तक मोटा जुर्माना लगाकर आवेदन करने की अनुमति दी थी। फीस भले ही लगभग 12 सौ रुपये हो, लेकिन जुर्माना मार्च और अप्रैल तक आठ से नौ हजार रुपये तक पहुंच जाता है। उसमें प्रशासन की अनुमति अलग से। ऐसे में गुरुजी के पास कोई चारा नहीं बचा है। शिक्षकों ने इस बार कुवि में मोटे जुर्माने पर प्राइवेट आवेदन भी किया है। हालांकि कुछ शिक्षक समय की नजाकत को पहले ही भांप गए थे और उन्होंने पिछले वर्ष दिसंबर या फिर इस वर्ष जनवरी में ही आवेदन भी कर दिया था। मई में परीक्षा होगी तो एक वर्ष का कार्य एक माह में ही पूरा हो जाएगा।
Sponsored link :
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC