क्लर्क ने तैयार कर दी एसीपी और एसीआर
अंबाला : एक क्लर्क ने बीईओ के हस्ताक्षर कर कई शिक्षकों व कर्मचारियों की एसीआर व एसीपी खुद ही तैयार कर दी और उसे शिक्षा निदेशालय को भेज दिया। लंबे समय तक यह खेल चलता रहा, लेकिन किसी को इसका पता नहीं चला। क्लर्क को प्रतिनियुक्ति पर खंड शिक्षा अधिकारी बराड़ा के कार्यालय में भेजा गया था। वर्तमान में यह क्लर्क एसडीएम कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर है।
ऐसे सामने आया मामला :
22 मार्च को निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग पंचकूला ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को एक पत्र लिखा। राजकीय माध्यमिक विद्यालय धनोकटा में कार्यरत इएचएसएम चमकौर सिंह की एसीपी का परफोर्मा सही तरह से भरकर नहीं भेजा गया है। साथ ही चमकौर सिंह के एसीपी मामले में कुछ खामियां भी हैं। निदेशालय ने यह एसीपी परफोर्मा 22 अक्टूबर, 2014 और 31 मार्च 2015 को भेजा गया था जिसे मार्च 2016 तक आपत्ति दूर करके वापस निदेशालय को नहीं नहीं भेजा गया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के पास से यह केस बराड़ा के तत्कालीन बीईओ के पास केस भेज दिया। पत्र बीईओ के पहुंचा तो उनके पांव तले से जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी जिले सिंह को लिखित रूप से दी।
क्या होती है एसीआर व एसीपी :
एनुअल कॉनफिडेंशल रिपोर्ट व एनुअल एश्योरड प्रोग्रेशन दोनों ही स्थाई कर्मचारियों की प्रमोशन, उनकी वार्षिक रिपोर्ट व वार्षिक आय से जुड़ी हैं। इन्हीं के आधार पर कर्मचारियों को पदोन्नति व नया ग्रेड मिलता है। इसी में गड़बड़झाला पाया गया है। इन पर मोहर तो बीइओ की लगी है, लेकिन हस्ताक्षर क्लर्क ने अपने किए हैं।
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अंबाला : एक क्लर्क ने बीईओ के हस्ताक्षर कर कई शिक्षकों व कर्मचारियों की एसीआर व एसीपी खुद ही तैयार कर दी और उसे शिक्षा निदेशालय को भेज दिया। लंबे समय तक यह खेल चलता रहा, लेकिन किसी को इसका पता नहीं चला। क्लर्क को प्रतिनियुक्ति पर खंड शिक्षा अधिकारी बराड़ा के कार्यालय में भेजा गया था। वर्तमान में यह क्लर्क एसडीएम कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर है।
ऐसे सामने आया मामला :
22 मार्च को निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग पंचकूला ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को एक पत्र लिखा। राजकीय माध्यमिक विद्यालय धनोकटा में कार्यरत इएचएसएम चमकौर सिंह की एसीपी का परफोर्मा सही तरह से भरकर नहीं भेजा गया है। साथ ही चमकौर सिंह के एसीपी मामले में कुछ खामियां भी हैं। निदेशालय ने यह एसीपी परफोर्मा 22 अक्टूबर, 2014 और 31 मार्च 2015 को भेजा गया था जिसे मार्च 2016 तक आपत्ति दूर करके वापस निदेशालय को नहीं नहीं भेजा गया। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के पास से यह केस बराड़ा के तत्कालीन बीईओ के पास केस भेज दिया। पत्र बीईओ के पहुंचा तो उनके पांव तले से जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी जिले सिंह को लिखित रूप से दी।
क्या होती है एसीआर व एसीपी :
एनुअल कॉनफिडेंशल रिपोर्ट व एनुअल एश्योरड प्रोग्रेशन दोनों ही स्थाई कर्मचारियों की प्रमोशन, उनकी वार्षिक रिपोर्ट व वार्षिक आय से जुड़ी हैं। इन्हीं के आधार पर कर्मचारियों को पदोन्नति व नया ग्रेड मिलता है। इसी में गड़बड़झाला पाया गया है। इन पर मोहर तो बीइओ की लगी है, लेकिन हस्ताक्षर क्लर्क ने अपने किए हैं।
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