जागरण संवाददाता, जींद : हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन की बैठक अग्रवाल
धर्मशाला में मुख्य संरक्षक सतपाल बूरा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें
1 जुलाई को निदेशक के प्रदेशभर के 1982 मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों को
वापस करने के आदेश का विरोध जताया है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले के विरोध में आज प्रदेशभर के मौलिक विद्यालय मुख्याध्यापकों व शिक्षकों में रोष है। विभाग ने बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए ये तुगलकी आदेश जारी कर दिए जबकि इस सूची में मास्टर वर्ग के सभी मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों की सभी योग्यताएं पूर्ण करते हैं।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश मलिक ने बताया कि वापस किए गए 85 प्रतिशत मौलिक स्कूल मुख्याध्यापक उपरोक्त पद की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं और उन्हें बिना कारण बताओ नोटिस दिए पदोन्नति सूची आदेश को वापस करने का जो आदेश जारी किया है, वह पूरी तरह से गैर कानूनी है। मौलिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी मौलिक स्कूल मुख्याध्यापक पद व मौलिक शिक्षा से नकारात्मक भावना से ओत-प्रोत हैं।
मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों को टीजीटी के समान वर्कलोड दिया जाना, गणित अध्यापक से उपरोक्त पद पर पदोन्नति होने उपरांत कक्षा 6-8 के सभी सेक्शन दो-दो हो आदि गलत निर्णय लेकर मुख्याध्यापक व शिक्षक वर्ग को बिना वजह परेशान किया जा रहा है। वापस करने से टीजीटी शिक्षकों को सरप्लस करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
कर्ण ¨सह बनाम हरियाणा सरकार के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विभाग की ओर से दिए शपथ पत्र व उच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन विभाग ने किया है। सरकार मौलिक स्कूल मुख्याध्यापक के पदों के सृजन में आरटीई के प्रावधान का उल्लंघन कर रही है, वहीं रेशनेलाइजेशन के फार्मूले शिक्षा सुधार के दृष्टिकोण की बजाय टीजीटी को सरप्लस करने के लिए तैयार किया गया है।
एसोसिएशन ने निर्णय लिया कि यदि एक सप्ताह के अंदर-अंदर आदेश रद नहीं हुए तो अगले सप्ताह राज्यस्तरीय बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर संघर्ष किया जाएगा। कल ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण लेकर न्याय की लड़ाई भी लड़ेंगे। इस अवसर पर राज ¨सह मलिक, संजय सहारण, रामकुमार, रमेश पूनिया, राकेश नरवाल, टेकचंद, जगदीश ढुल, सूरजभान मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि इस फैसले के विरोध में आज प्रदेशभर के मौलिक विद्यालय मुख्याध्यापकों व शिक्षकों में रोष है। विभाग ने बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए ये तुगलकी आदेश जारी कर दिए जबकि इस सूची में मास्टर वर्ग के सभी मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों की सभी योग्यताएं पूर्ण करते हैं।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश मलिक ने बताया कि वापस किए गए 85 प्रतिशत मौलिक स्कूल मुख्याध्यापक उपरोक्त पद की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं और उन्हें बिना कारण बताओ नोटिस दिए पदोन्नति सूची आदेश को वापस करने का जो आदेश जारी किया है, वह पूरी तरह से गैर कानूनी है। मौलिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी मौलिक स्कूल मुख्याध्यापक पद व मौलिक शिक्षा से नकारात्मक भावना से ओत-प्रोत हैं।
मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों को टीजीटी के समान वर्कलोड दिया जाना, गणित अध्यापक से उपरोक्त पद पर पदोन्नति होने उपरांत कक्षा 6-8 के सभी सेक्शन दो-दो हो आदि गलत निर्णय लेकर मुख्याध्यापक व शिक्षक वर्ग को बिना वजह परेशान किया जा रहा है। वापस करने से टीजीटी शिक्षकों को सरप्लस करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
कर्ण ¨सह बनाम हरियाणा सरकार के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विभाग की ओर से दिए शपथ पत्र व उच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन विभाग ने किया है। सरकार मौलिक स्कूल मुख्याध्यापक के पदों के सृजन में आरटीई के प्रावधान का उल्लंघन कर रही है, वहीं रेशनेलाइजेशन के फार्मूले शिक्षा सुधार के दृष्टिकोण की बजाय टीजीटी को सरप्लस करने के लिए तैयार किया गया है।
एसोसिएशन ने निर्णय लिया कि यदि एक सप्ताह के अंदर-अंदर आदेश रद नहीं हुए तो अगले सप्ताह राज्यस्तरीय बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर संघर्ष किया जाएगा। कल ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण लेकर न्याय की लड़ाई भी लड़ेंगे। इस अवसर पर राज ¨सह मलिक, संजय सहारण, रामकुमार, रमेश पूनिया, राकेश नरवाल, टेकचंद, जगदीश ढुल, सूरजभान मौजूद थे।
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