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79 में से अध्यापकों के 40 पद खाली, फिर भी मॉडल स्कूल

शिक्षा के सुधारीकरण पर भले ही सरकार लाख दावे करती फिरे लेकिन जमीनी हकीकत ना केवल चौंकाने वाली है बल्कि शर्मनाक भी है। स्कूल होते हैं बच्चों को पढ़ाई कराने के लिए, लेकिन अगर आपको पता चले कि सैकड़ों बच्चे स्कूल आते तो हैं, लेकिन खाली बैठ मस्ती कर वापस चले जाते हैं तो आपको आश्चर्य होगा। यह सिलसिला एक-दो नहीं बल्कि कई महीनों से जारी है। बात हो रही है गांव इंदाछोई के मॉडल स्कूल की। कहने को स्कूल इंग्लिश मीडियम है, लेकिन अध्यापकों की भारी कमी इस स्कूल को सामान्य स्कूलों से भी पीछे धकेलती नजर आ रही है।

बदतर हालात, 79 अध्यापकों में से 40 पद खाली
इंदाछोई के मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में व्यवस्था के बदतर हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्कूल के अंदर अध्यापकों के कुल 79 पद स्वीकृत हैं लेकिन कुल पदों में से 40 पद खाली पड़े हैं। ऐसा नहीं है कि स्कूल प्रशासन ने इस संदर्भ में कोई प्रयास नहीं किए, लेकिन हालात नहीं सुधरे। अब आधे से अधिक अध्यापकों के पद अगर खाली हैं तो इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर बच्चों की पढ़ाई का कितना नुकसान हो रहा होगा।

कैसे बनेंगे इंजीनियर, डाक्टर, मेडिकल-नॉन मेडिकल के अध्यापक ही नहीं
कागजों में ये स्कूल सरकार की स्पेशल अटेंशन पाने वाले मॉडल स्कूलों में से एक है। मॉडल स्कूल इसलिए, क्योंकि यहां पर बच्चों की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम से कराई जाती है। साफ शब्दों में कहें तो गांव के जो बच्चे अपने जीवन में कुछ बनना चाहते हैं, उनके लिए इस स्कूल में सारी संभावनाएं हो सकती थीं, लेकिन इंजीनियर और डाक्टर बनने का ख्वाब लेकर जो विद्यार्थी स्कूल में आए थे, उनको अब मायूसी के साथ साथ अपना साल भी खराब होता दिख रहा है। इतने महत्वपूर्ण स्कूल में ना तो मेडिकल पढ़ाने वाला कोई अध्यापक है और ना ही नॉन-मेडिकल पढ़ाने वाला। ऐसे में इस विषय की पढ़ाई बच्चों को खुद ही करनी पड़ रही है।

प्राइमरी में भी बेहतर नहीं हालात
इंदाछोई मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की बात की जाए तो ऐसा नहीं है कि महज बड़ी कक्षाओं के अध्यापकों की कमी है। स्कूल का प्राइमरी विभाग भी अध्यापकों की कमी की मार झेल रहा है। प्राइमरी विभाग में इस समय लगभग 6 जेबीटी अध्यापकों के पद खाली हैं। इन पदों के लिए भी शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को बार-बार पत्र भेजे गए हैं लेकिन अभी तक महज आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं हुआ है।

बहुत हुआ इंतजार, अब सीएम से मिलने की तैयारी
लंबे समय से स्कूल में अध्यापकों के पदों को भरने का आश्वासन ले रहे ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण अब सीएम मनोहर लाल के फतेहाबाद दौरे का इंतजार कर रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण इस बार सरपंच रामकुमार के नेतृत्व में सीएम से भी मुलाकात का मन बना रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सूबे के मुखिया उनके स्कूल के बच्चों की पुकार जरूर सुनेेंगे।

पीजीटी ट्रांसफर में ऑनलाइन सिस्टम से गायब था स्कूल
शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों पीजीटी अध्यापकों के ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन सिस्टम अपनाया था लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आनलाइन सिस्टम में इंदाछोई स्कूल का विकल्प ही नहीं दिया गया था। इसके चलते कई पद रिक्त होने के बावजूद इस स्कूल में बाहर से ट्रांसफर होकर अध्यापक नहीं आ सके।

इंदाछोई मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ये सीटें हैं खाली
पद                       खाली
लेक्चरार
बायो                       1
केमिस्ट्री                    1
कंप्यूटर साइंस            1
इंग्लिश                      1
हिंदी                         1
होम साइंस                     1
मैथ                            03
म्यूजिक                         1
फिजिक्स                       1
पंजाबी                         1
फाइन आर्ट                    1

मास्टर
डीपीई                           1
साईस                            3
सामाजिक विज्ञान                4
मैथ                              5

सीएंडवी
हिंदी                           1
म्यूजिक                       1

अन्य
जूनियर लैब संचालक      1
एलए                       2
चपरासी                    3
जेबीटी                    6

‘स्कूल में अध्यापकों की काफी कमी है। हमने इस बारे में शिक्षा विभाग को शिकायत भी दी है। अगर विभाग ध्यान नहीं देता है तो इस बारे में सीएम से शिकायत करेंगे। बच्चों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे।’
-रामकुमार, सरपंच गांव इंदाछोई

‘इंदाछोई मॉडल स्कूल में अध्यापकों की कमी का मामला उच्चाधिकारियों को भेजा जा चुका है। जैसे ही वहां से आदेश आते हैं, स्कूल में अध्यापक भेज दिए जाएंगे। अध्यापकों की कमी कई जगह पर है जिसके चलते ये परेशानी आ रही है।’
-रोशन लाल, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी, टोहाना। 
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