एकतरफ तो प्रदेश के स्कूलों में गीता पढ़ाने की घोषणाएं की जा रही हैं, वहीं
दूसरी तरफ स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई कराने के लिए शिक्षक ही नहीं है।
सरकार सोनीपत को शिक्षा का हब मान रही है, लेकिन यहां के सरकारी स्कूलों की
हालत बद से बदतर होती जा रही है।
राई ब्लाॅक के गांव नाथूपुर के राजकीय प्राइमरी स्कूल में 136 बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल दो शिक्षक हैं। इन दो में भी एक अतिथि अध्यापक हैं। स्कूल की बिल्डिंग भी जर्जर हो चुकी है। उद्योगपतियों ने एक साल पहले कमरे बनवाने का वादा किया था, वह भी अभी पूरा नहीं हुआ हैं। ऐसे में पंचायत ने शिक्षा विभाग को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि एक महीने में शिक्षक नहीं भेजे गए तो वे स्कूल को ताला जड़ देंगे और बच्चों का दाखिला किसी प्राइवेट स्कूल में करा देंगे। राजकीय प्राइमरी स्कूल नाथूपुर में अभी हाल में 136 विद्यार्थी हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए केवल एक स्थाई एक अतिथि शिक्षक है। स्कूल में नार्म के हिसाब से पांच शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। स्कूल भले ही पांचवीं कक्षा तक है, लेेकिन विद्यार्थी केवल दो कक्षाओं में ही पढ़ रहे हैं। स्कूल में पढ़ाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। इंचार्ज अनिल कुमार ने कहा कि वे हर महीने सरकार को डिमांड पत्र भेज रहे हैं।
^फिलहाल शिक्षकों की कमी है। एक शिक्षक डेपुटेशन पर भी भेजा गया है। वे प्रयास कर रहे हैं कि स्कूल में स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति की जा सके।' -सुरेंद्रमोर, खंड शिक्षा अधिकारी राई।
सरपंच पवित्रा देवी ने कहा कि अभिभावक स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजते हैं। बगैर शिक्षक के स्कूल में पढ़ाई कैसे होती होगी। यह विभाग को भी पता है। स्कूल में बच्चे खेलकर घर लौट आते हैं। इससे अच्छा है कि वे स्कूल में बच्चों को भेजे ही ना। यदि एक महीने में स्कूल को शिक्षक नहीं मिले तो अभिभावक यहां से अपने बच्चों को हटा लेंगे।
सरपंच पवित्रा देवी, राजपाल सिंह, खजान सिंह, दलीप सिंह, धर्मपाल, विनोद, सतीश, फूल सिंह, कदार सिंह नंबरदार ने कहा कि स्कूल की बिल्डिंग भी कंडम हो चुकी है। केवल दो नए कमरे बचे हुए हैं। जहां सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को मजबूरी में एक साथ बैठाना पड़ रहा है। उद्योगपतियों ने स्कूल में नए भवन बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन उन्होंने एक साल बाद भी कोई काम नहीं कराया। इसको लेकर भी पंचायत में रोष है।
राई ब्लाॅक के गांव नाथूपुर के राजकीय प्राइमरी स्कूल में 136 बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल दो शिक्षक हैं। इन दो में भी एक अतिथि अध्यापक हैं। स्कूल की बिल्डिंग भी जर्जर हो चुकी है। उद्योगपतियों ने एक साल पहले कमरे बनवाने का वादा किया था, वह भी अभी पूरा नहीं हुआ हैं। ऐसे में पंचायत ने शिक्षा विभाग को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि एक महीने में शिक्षक नहीं भेजे गए तो वे स्कूल को ताला जड़ देंगे और बच्चों का दाखिला किसी प्राइवेट स्कूल में करा देंगे। राजकीय प्राइमरी स्कूल नाथूपुर में अभी हाल में 136 विद्यार्थी हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए केवल एक स्थाई एक अतिथि शिक्षक है। स्कूल में नार्म के हिसाब से पांच शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। स्कूल भले ही पांचवीं कक्षा तक है, लेेकिन विद्यार्थी केवल दो कक्षाओं में ही पढ़ रहे हैं। स्कूल में पढ़ाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। इंचार्ज अनिल कुमार ने कहा कि वे हर महीने सरकार को डिमांड पत्र भेज रहे हैं।
^फिलहाल शिक्षकों की कमी है। एक शिक्षक डेपुटेशन पर भी भेजा गया है। वे प्रयास कर रहे हैं कि स्कूल में स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति की जा सके।' -सुरेंद्रमोर, खंड शिक्षा अधिकारी राई।
सरपंच पवित्रा देवी ने कहा कि अभिभावक स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजते हैं। बगैर शिक्षक के स्कूल में पढ़ाई कैसे होती होगी। यह विभाग को भी पता है। स्कूल में बच्चे खेलकर घर लौट आते हैं। इससे अच्छा है कि वे स्कूल में बच्चों को भेजे ही ना। यदि एक महीने में स्कूल को शिक्षक नहीं मिले तो अभिभावक यहां से अपने बच्चों को हटा लेंगे।
सरपंच पवित्रा देवी, राजपाल सिंह, खजान सिंह, दलीप सिंह, धर्मपाल, विनोद, सतीश, फूल सिंह, कदार सिंह नंबरदार ने कहा कि स्कूल की बिल्डिंग भी कंडम हो चुकी है। केवल दो नए कमरे बचे हुए हैं। जहां सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को मजबूरी में एक साथ बैठाना पड़ रहा है। उद्योगपतियों ने स्कूल में नए भवन बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन उन्होंने एक साल बाद भी कोई काम नहीं कराया। इसको लेकर भी पंचायत में रोष है।