चंडीगढ़। प्रदेश में पीजीटी शिक्षकों की भर्ती को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
दरअसल पूजा ग्रोवर नाम की महिला ने एडवोकेट लोकेश मलिक के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका के जरिए उन्होंने सरकार के पीजीटी शिक्षकों की भर्ती के लिए एचटेट अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती दी थी।
जिस पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को 23 अगस्त के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
याचिकाकर्ता ने कहा था कि शिक्षकों के लिए योग्यता मानक तय करने का अधिकार एनसीटी (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) को है। एनसीटी ने 2001 में शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता तय की थी। इसके बाद हरियाणा सरकार ने 2008 में एक आदेश जारी कर पीजीटी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी।
ये केवल आठवीं तक की कक्षाओं का शिक्षण करने वाले शिक्षकों पर लागू होता है, सेकेंडरी के शिक्षकों के लिए एमए बीएड होना अनिवार्य है। बावजूद इसके हरियाणा सरकार ने मनमाने तरीके से पीजीटी शिक्षकों के लिए एचटेट अनिवार्य किया है।
पूजा ग्रोवर का कहना है कि शिक्षा हमारे संविधान की कंकरेंट लिस्ट में आता है, जिस पर केंद्र भी कानून बना सकता है और राज्य भी लेकिन जहां केंद्र का कानून होता है वहां राज्य को अधिकार नहीं होता कि इसे बदल सके। ऐसे में राज्य में पीजीटी शिक्षकों के लिए एचटेट की अनिवार्यता के प्रावधान को रद्द किया जाए।
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