134ए : निजी स्कूलों को सरकार देगी पैसा
** 134ए के तहत दाखिला, 55 फीसदी या ज्यादा अंक वालों को लाभ
चंडीगढ़ : हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों में कक्षा दूसरी से आठवीं तक गरीब बच्चों को 10 फीसदी दाखिला देने के बदले सरकार स्कूल संचालकों को पैसा अदा करेगी। अभी तक एक नया पैसा भी इन स्कूलों को नहीं दिया जाता है। दाखिला केवल उन्हीं बच्चों को मिल सकेगा जिनके 55 फीसदी अंक होंगे।
शिक्षा विभाग ने हरियाणा स्कूल शिक्षा नियमों में संशोधन करने के लिए यह प्रस्ताव शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को भेज दिया है।
सैद्धांतिक तौर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव आरके खुल्लर के साथ हुई बैठक में इन संशोधनों को मौखिक मंजूरी मिल गई है। उसके बाद ही यह फाइल विधिवत तौर पर चलाई है। नौंवीं से बारहवीं तक के बच्चों को दाखिला देने पर स्कूल संचालकों को कोई पैसा नहीं मिलेगा, क्योंकि स्कूल संचालक पहले से ही उन बच्चों से उतनी फीस वसूल सकते हैं जितनी फीस सरकारी स्कूलों में वसूली जाती है।
यह होगी फीस
शहरी स्कूलों में दूसरी से पांचवीं कक्षा तक के लिए 300 रुपये और ग्रामीण स्कूलों को 200 रुपये प्रति बच्चा। छठी से आठवीं तक शहरी स्कूलों को 400 व ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को 300 रुपये देंगे।
गरीब कौन?
जिन परिवारों की सालाना आमदनी सभी स्रोतों से दो लाख रुपये से ज्यादा नहीं होगी। उन्हें आर्थिक तौर पर कमजोर (ईडब्ल्यूएस) माना जाएगा।
नियम तय कर रहे
"134ए के तहत दाखिला देने के लिए सरकार नियम तय कर रही है। नियम तय होते ही दाखिला दे दिया जाएगा। "-- केशनी आनंद अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
** 134ए के तहत दाखिला, 55 फीसदी या ज्यादा अंक वालों को लाभ
चंडीगढ़ : हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों में कक्षा दूसरी से आठवीं तक गरीब बच्चों को 10 फीसदी दाखिला देने के बदले सरकार स्कूल संचालकों को पैसा अदा करेगी। अभी तक एक नया पैसा भी इन स्कूलों को नहीं दिया जाता है। दाखिला केवल उन्हीं बच्चों को मिल सकेगा जिनके 55 फीसदी अंक होंगे।
शिक्षा विभाग ने हरियाणा स्कूल शिक्षा नियमों में संशोधन करने के लिए यह प्रस्ताव शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को भेज दिया है।
सैद्धांतिक तौर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव आरके खुल्लर के साथ हुई बैठक में इन संशोधनों को मौखिक मंजूरी मिल गई है। उसके बाद ही यह फाइल विधिवत तौर पर चलाई है। नौंवीं से बारहवीं तक के बच्चों को दाखिला देने पर स्कूल संचालकों को कोई पैसा नहीं मिलेगा, क्योंकि स्कूल संचालक पहले से ही उन बच्चों से उतनी फीस वसूल सकते हैं जितनी फीस सरकारी स्कूलों में वसूली जाती है।
यह होगी फीस
शहरी स्कूलों में दूसरी से पांचवीं कक्षा तक के लिए 300 रुपये और ग्रामीण स्कूलों को 200 रुपये प्रति बच्चा। छठी से आठवीं तक शहरी स्कूलों को 400 व ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को 300 रुपये देंगे।
गरीब कौन?
जिन परिवारों की सालाना आमदनी सभी स्रोतों से दो लाख रुपये से ज्यादा नहीं होगी। उन्हें आर्थिक तौर पर कमजोर (ईडब्ल्यूएस) माना जाएगा।
नियम तय कर रहे
"134ए के तहत दाखिला देने के लिए सरकार नियम तय कर रही है। नियम तय होते ही दाखिला दे दिया जाएगा। "-- केशनी आनंद अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा
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