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स्कूल में बैठने के लिए जगह नहीं, इसलिए छात्रा को एडमिशन देने से किया इंकार

स्कूल में बैठने के लिए जगह नहीं, इसलिए छात्रा को एडमिशन देने से किया इंकार
** शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र
बराड़ा : एक तरफ भाजपा सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देकर बेटियों का मान बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ बराड़ा के सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल बेटियों को ही स्कूल में बैठने की जगह होने के कारण एडमिशन देने से मना कर रही हैं। ऐसे में भाजपा सरकार की यह आदेश धरातल पर दम तोड़ते नजर रहे हैं।

दरअसल, गांव मलिकपुर में रहने वाली बीपीएल पात्र दलित छात्रा के रिश्तेदार सुखविंद्र ने बताया कि उसके पिता की कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी है और वह काफी गरीब परिवार से संबंध रखती है। पहले उसने अपने रिश्तेदारों के पास सपेड़ा के सरकारी स्कूल में आठवीं तक की पढ़ाई की, लेकिन अब उसके रिश्तेदारों ने उसे आगे अपने पास रखने से मना कर दिया। जिसके बाद वह स्थानीय गांव मलिकपुर में अपनी मां के पास गई। मलिकपुर में केवल पांचवी स्तर का ही प्राइमरी स्कूल है। इसलिए वह बराड़ा के राजकीय वरिष्ठ माडल संस्कृति विद्यालय में दाखिला लेना चाहती थी। सुखविंद्र ने बताया कि करीब दो सप्ताह से वह उसका दाखिला करवाने के लिए स्कूल के चक्कर काट रहे हैं। पहले कागज पूरे किए और दाखिले के लिए बीईओ कार्यालय से लिखवाया। मगर आज तक स्कूल की प्रिंसिपल ने दाखिला नहीं दिया। आज जब छात्रा द्वारा सभी औपचारिकताएं पूर्री कर दी गई, तब उसे बिना कोई ठोस वजह के दाखिले देने से मना कर दिया।
उन्होंने बताया कि वह छात्रा को उसका हक दिलाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर एवं शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को शिकायत पत्र लिख रहे हैं।
"स्कूल में बच्चों को बैठाने की क्षमता ही नहीं रही। पहले ही बच्चे इतने अधिक दाखिल हो चुके हंै कि बरामदे में नौवीं के एक सेक्शन और दूसरी तरफ दूसरे सेक्शन का मुंह करके बच्चों को बिठाया गया है। छात्रा को गांव वाले स्कूल में भी दाखिल होने की बात कही है।"-- राजबीरसिंह, प्रिंसिपल मॉडल संस्कृति विद्यालय बराड़ा।
"यह मामला संज्ञान में आया है। छात्रा का अतिशीघ्र दाखिला दिया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को भी यह निर्देश दिए जाएंगे कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित रहे।"-- जिलेसिंह अत्री, डीईओ अम्बाला।

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