गत वर्ष की
तुलना में इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा का
रिजल्ट 6.60 फीसदी बेहतर रहा। फिर भी राज्य में यमुनानगर एक स्थान फिसलकर
19वें नंबर पर पहुंच गया। जबकि पिछली बार 48.73 फीसदी रिजल्ट के साथ यह
जिला 18वें नंबर पर था।
रिजल्ट की प्रतिशतता में बढ़त की वजह से इस बार अधिकारी थोड़ी राहत में दिख रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद कई स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल पुरानी सब्जी मंडी यमुनानगर में गणित विषय में ज्यादातर छात्राएं ही फेल हो गईं। पूरे साल शिक्षक होने को इसकी बड़ी वजह बताया जा रहा है। हालांकि जिन स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ के बावजूद रिजल्ट खराब रहा। अब उनके स्कूल मुखियाओं से स्पष्टीकरण लेने की प्रक्रिया चल रहा है।
भटौलीने फिर मारी बाजी : जगाधरीब्लॉक के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल भटौली के छात्रों ने फिर बाजी मारी है। स्कूल का रिजल्ट 80.95 फीसदी रहा। इस साल स्कूल के 42 छात्र परीक्षा में बैठे थे। स्टॉप कम होने के बावजूद 34 छात्र पास हो गए। दूसरे स्थान पर राजकीय सीनियर सेकेंडरी दामला रहा। 79.37 फीसदी रिजल्ट के साथ यहां 63 में से 50 बच्चे पास हुए हैं। मॉडल कॉलोनी स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल का रिजल्ट 75.96 फीसदी रहा। यहां 104 में से 79 छात्रों को पास होने में कामयाबी मिली है। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल बुडिया का रिजल्ट भी 74.83 फीसदी रहा। स्टाफ कम होने के बावजूद इस स्कूल में 151 में से 113 छात्र पास हो गए।
स्टाफपूरा फिर भी खराब रहा रिजल्ट : राजकीयसेकेंडरी स्कूल हरिपुर कांबोज में पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद यहां 12वीं कक्षा का रिजल्ट बेहद खराब रहा। इस स्कूल के 24 छात्रों ने परीक्षा दी थी, लेकिन महज नौ छात्र ही पास हो पाए। यही स्थिति राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल नागल की रही। यहां भी लगभग स्टाफ पूरा था। इसके बावजूद 24 में से 7 छात्र ही पास हो पाए। स्कूल का रिजल्ट महज 29.16 फीसदी रहा। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल हरनौल की स्थिति सबसे खराब रही। यहां तो 20 में से महज चार ही छात्र पास हो पाए। 20 फीसदी रिजल्ट के साथ हरनौल जगाधरी ब्लॉक में सबसे पीछे रहा। पर्याप्त स्टाफ होने की वजह से रिजल्ट खराब आने की बात कही जा रही है। पर्याप्त स्टाफ के बावजूद राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल कैंप का रिजल्ट भी खराब रहा। यहां 285 में से महज 123 छात्र ही पास हो पाए। स्कूल का रिजल्ट 43.15 फीसदी रहा। स्टाफ होने के बावजूद राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल औरंगाबाद का रिजल्ट बेहतरीन रहा। यहां 29 में से 18 छात्र पास हुए। स्कूल का रिजल्ट 62.07 फीसदी रहा।
^पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद जिन स्कूलों का रिजल्ट बेहद खराब रहा। उन स्कूलों के मुखियाओं से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। ये पूछा जाएगा रिजल्ट क्यों खराब आया। वे स्कूल मुखिया प्रशंसा के पात्र हैं जहां स्टाफ होने के बावजूद रिजल्ट शानदार रहा। हम उन स्कूलों की लिस्ट बना रहे हैं। इन मुखियाओं को सम्मानित किया जाएगा। दूसरे मुखियाओं को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। सुधीरकालड़ा, ब्लॉक एजूकेशन ऑफिसर, जगाधरी
गणित में फेल हो गई ज्यादातर छात्राएं
राजकीयसीनियर सेकेंडरी स्कूल पुरानी सब्जी मंडी का रिजल्ट यूं तो 55 फीसदी से ज्यादा रहा। पर गणित विषय में ज्यादातर छात्राएं फेल हो गईं। पूरे साल स्कूल में गणित शिक्षक का पद खाली पड़ा रहा। शिक्षा अधिकारियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। यहां 78 में से 43 छात्राएं पास हुई लेकिन इनमें से ज्यादातर गणित विषय में फेल हो गईं। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल मॉडल टाउन का रिजल्ट भी बेहतर नहीं रहा। हैरानी की बात है कि जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यालय इसी स्कूल से सटा हुआ है। फिर भी इस स्कूल का रिजल्ट 40.54 फीसदी रहा। यहां 74 में से 30 छात्र ही पास हो पाए। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल महिलांवाली का रिजल्ट भी 45 फीसदी से नीचे रहा। यहां 54 में से 24 छात्र ही पास हो पाए।
94 फीसदी अंकों के साथ गुरविंद्र अव्वल
सनातनधर्म वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल जगाधरी की छात्रा गुरविंद्र कौर ने विज्ञान संकाय में 94 फीसदी अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। कला संकाय में 96 फीसदी छात्र सफल रहे। इनमें किरण ने पहला स्थान हासिल किया। 87.81 फीसदी अंकों के साथ किरण पहले नंदिनी दूसरे तनिषा रावत तीसरे स्थान पर रही। कॉमर्स संकाय में 181 छात्रों में से 94 फीसदी छात्र पास हुए। आशिमा ने पहला, प्रदीप कुमार ने दूसरा नेहा रानी ने तीसरा स्थान हासिल किया। साइंस संकाय में गुरविंद्र कौर पहले, गौरव कुमार दूसरे अवतार सिंह तीसरे स्थान पर रहा। प्रिंसिपल सतीश गर्ग ने बताया कि 102 छात्रों ने मेरिट में स्थान पाकर स्कूल अपने परिवार का नाम रोशन किया है।
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रिजल्ट की प्रतिशतता में बढ़त की वजह से इस बार अधिकारी थोड़ी राहत में दिख रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद कई स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल पुरानी सब्जी मंडी यमुनानगर में गणित विषय में ज्यादातर छात्राएं ही फेल हो गईं। पूरे साल शिक्षक होने को इसकी बड़ी वजह बताया जा रहा है। हालांकि जिन स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ के बावजूद रिजल्ट खराब रहा। अब उनके स्कूल मुखियाओं से स्पष्टीकरण लेने की प्रक्रिया चल रहा है।
भटौलीने फिर मारी बाजी : जगाधरीब्लॉक के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल भटौली के छात्रों ने फिर बाजी मारी है। स्कूल का रिजल्ट 80.95 फीसदी रहा। इस साल स्कूल के 42 छात्र परीक्षा में बैठे थे। स्टॉप कम होने के बावजूद 34 छात्र पास हो गए। दूसरे स्थान पर राजकीय सीनियर सेकेंडरी दामला रहा। 79.37 फीसदी रिजल्ट के साथ यहां 63 में से 50 बच्चे पास हुए हैं। मॉडल कॉलोनी स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल का रिजल्ट 75.96 फीसदी रहा। यहां 104 में से 79 छात्रों को पास होने में कामयाबी मिली है। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल बुडिया का रिजल्ट भी 74.83 फीसदी रहा। स्टाफ कम होने के बावजूद इस स्कूल में 151 में से 113 छात्र पास हो गए।
स्टाफपूरा फिर भी खराब रहा रिजल्ट : राजकीयसेकेंडरी स्कूल हरिपुर कांबोज में पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद यहां 12वीं कक्षा का रिजल्ट बेहद खराब रहा। इस स्कूल के 24 छात्रों ने परीक्षा दी थी, लेकिन महज नौ छात्र ही पास हो पाए। यही स्थिति राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल नागल की रही। यहां भी लगभग स्टाफ पूरा था। इसके बावजूद 24 में से 7 छात्र ही पास हो पाए। स्कूल का रिजल्ट महज 29.16 फीसदी रहा। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल हरनौल की स्थिति सबसे खराब रही। यहां तो 20 में से महज चार ही छात्र पास हो पाए। 20 फीसदी रिजल्ट के साथ हरनौल जगाधरी ब्लॉक में सबसे पीछे रहा। पर्याप्त स्टाफ होने की वजह से रिजल्ट खराब आने की बात कही जा रही है। पर्याप्त स्टाफ के बावजूद राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल कैंप का रिजल्ट भी खराब रहा। यहां 285 में से महज 123 छात्र ही पास हो पाए। स्कूल का रिजल्ट 43.15 फीसदी रहा। स्टाफ होने के बावजूद राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल औरंगाबाद का रिजल्ट बेहतरीन रहा। यहां 29 में से 18 छात्र पास हुए। स्कूल का रिजल्ट 62.07 फीसदी रहा।
^पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद जिन स्कूलों का रिजल्ट बेहद खराब रहा। उन स्कूलों के मुखियाओं से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। ये पूछा जाएगा रिजल्ट क्यों खराब आया। वे स्कूल मुखिया प्रशंसा के पात्र हैं जहां स्टाफ होने के बावजूद रिजल्ट शानदार रहा। हम उन स्कूलों की लिस्ट बना रहे हैं। इन मुखियाओं को सम्मानित किया जाएगा। दूसरे मुखियाओं को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। सुधीरकालड़ा, ब्लॉक एजूकेशन ऑफिसर, जगाधरी
गणित में फेल हो गई ज्यादातर छात्राएं
राजकीयसीनियर सेकेंडरी स्कूल पुरानी सब्जी मंडी का रिजल्ट यूं तो 55 फीसदी से ज्यादा रहा। पर गणित विषय में ज्यादातर छात्राएं फेल हो गईं। पूरे साल स्कूल में गणित शिक्षक का पद खाली पड़ा रहा। शिक्षा अधिकारियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। यहां 78 में से 43 छात्राएं पास हुई लेकिन इनमें से ज्यादातर गणित विषय में फेल हो गईं। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल मॉडल टाउन का रिजल्ट भी बेहतर नहीं रहा। हैरानी की बात है कि जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यालय इसी स्कूल से सटा हुआ है। फिर भी इस स्कूल का रिजल्ट 40.54 फीसदी रहा। यहां 74 में से 30 छात्र ही पास हो पाए। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल महिलांवाली का रिजल्ट भी 45 फीसदी से नीचे रहा। यहां 54 में से 24 छात्र ही पास हो पाए।
94 फीसदी अंकों के साथ गुरविंद्र अव्वल
सनातनधर्म वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल जगाधरी की छात्रा गुरविंद्र कौर ने विज्ञान संकाय में 94 फीसदी अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। कला संकाय में 96 फीसदी छात्र सफल रहे। इनमें किरण ने पहला स्थान हासिल किया। 87.81 फीसदी अंकों के साथ किरण पहले नंदिनी दूसरे तनिषा रावत तीसरे स्थान पर रही। कॉमर्स संकाय में 181 छात्रों में से 94 फीसदी छात्र पास हुए। आशिमा ने पहला, प्रदीप कुमार ने दूसरा नेहा रानी ने तीसरा स्थान हासिल किया। साइंस संकाय में गुरविंद्र कौर पहले, गौरव कुमार दूसरे अवतार सिंह तीसरे स्थान पर रहा। प्रिंसिपल सतीश गर्ग ने बताया कि 102 छात्रों ने मेरिट में स्थान पाकर स्कूल अपने परिवार का नाम रोशन किया है।
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