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सरकार चाहेगी तो बच सकती है नये-पुराने सभी गुरुओं की नौकरी

चंडीगढ़, 4 जून लटकी तलवार हट सकती है। अभी केवल कागजों के आधार पर ज्वाइनिंग और बर्खास्ती की कार्रवाई हो रही है, सरकार ने ग्राउंड पर होमवर्क नहीं किया है। माना जा रहा है कि संयुक्त मैरिट सूची जारी होने के बाद भी अधिकांश चयनित जेबीटी शिक्षकों को ज्वाइनिंग मिल सकती है।
हरियाणा पात्र अध्यापक संघ इससे जुड़े आंकड़ों को लेकर अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात करने की तैयारी में है।
दरअसल, 2013 के पात्र शिक्षकों को भी मैरिट सूची में शामिल करने के बाद चयनित शिक्षकों की कुल संख्या 12 हजार 731 (वेटिंग सूची सहित) बनती है। पूर्व की हुड्डा सरकार द्वारा 2014 में चयनित किए गए 9455 जेबीटी शिक्षकों के अलावा 634 वेटिंग लिस्ट में शामिल थे। इसी तरह से मौजूदा सरकार द्वारा निकाली गई सूची में शामिल करीब 2500 शिक्षकों में से 1850 के करीब चयनित शिक्षक हैं और बाकी वेटिंग में।
पात्र अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा का कहना है कि करीब 600 जेबीटी शिक्षक ऐसे हैं, जो बार-बार के नोटिस के बाद भी अपने फिंगर प्रिंट की जांच में शामिल नहीं हुए हैं। करीब 350 चयनित जेबीटी शिक्षकों के अंगूठों का मिलान नहीं हुआ है। ये दोनों फिगर मिलाकर 950 के करीब बनते हैं। 919 जेबीटी शिक्षक ऐसे हैं, जो दोनों ही सूचियों में हैं। राजेंद्र शर्मा का कहना है कि इन शिक्षकों का नाम हरियाणा की सूची में भी शामिल है और मेवात कैडर में भी। ये 919 जेबीटी शिक्षक दोनों जगह तो ज्वाइन करने से रहे। इसी तरह से करीब 650 ऐसे जेबीटी शिक्षक हैं, जिनका टीजीटी या पीजीटी में चयन हो चुका है।
उनका कहना है कि कुछ ऐसे भी शिक्षक हैं, जो दूसरे विभागों में नौकरी पर लगे हुए हैं और वे अब छोड़ने को राजी नहीं है। ऐसे शिक्षकों का आंकड़ा भी 200 के करीब बताया गया है। राजेंद्र शर्मा के अनुसार 2200 से 2500 के करीब ये पद बनते हैं, जो खाली ही रहने वाले हैं। ऐसे में अगर सरकार दोनों सूचियों के मिलाकर के साथ-साथ दूसरे विभागों व पदों पर ज्वाइन कर चुके शिक्षकों का आंकड़ा निकाला जाएगा तो लोवर मैरिट सूची में आए शिक्षकों की भी ज्वाइनिंग आसानी से हो सकेगी।
भाजपा सरकार ने दी अंडरटेकिंग : अक्तूबर-2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद चयनित जेबीटी शिक्षकों ने नियुक्ति-पत्र को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। मामला हाईकोर्ट में था और नियुक्ति-पत्र पर स्टे था, ऐसे में सरकार भी कुछ नहीं कर सकती थी। उधर, 2013 में पात्रता परीक्षा पास कर चुके शिक्षकों का भी सरकार पर दबाव था। सरकार ने हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग देकर कहा कि स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं और 2013 वाले शिक्षकों को भी लगाया जा सकता है। अंतिम कुमारी के केस का हवाला देते हुए सरकार ने यह भी कहा कि चयनित 9455 को हटाया भी नहीं जाएगा। हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद भाजपा सरकार ने 2500 (वेटिंग सूची सहित) के करीब और जेबीटी शिक्षकों की चयन सूची जारी कर दी।
इसलिए फंसा है पेच
पूर्व की हुड्डा सरकार ने वर्ष 2012 में 9870 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए राज्य अध्यापक पात्रता परीक्षा पास करने की शर्त है। ऐसे में 2012 तक जितने भी जेबीटी ने पात्रता परीक्षा पास की हुई थी, उन्होंने नौकरी के लिए आवेदन किया। राज्य शिक्षक भर्ती बोर्ड ने 14 अगस्त, 2014 को भर्ती के नतीजे घोषित किए। 9870 पदों के विरुद्ध 9455 शिक्षकों का चयन हुआ। अपंग एवं अन्य आरक्षित वर्गों के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिलने की वजह से बाकी पद खाली रहे। वर्ष 2012 में शिक्षा बोर्ड, भिवानी द्वारा पात्रता परीक्षा नहीं ली गई। यह परीक्षा 2013 में हुई। तब तक शिक्षक भर्ती बोर्ड जेबीटी भर्ती प्रक्रिया को पूरी नहीं कर पाया। 2013 में पात्रता परीक्षा पास करने वाले युवाओं ने भर्ती को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए मांग की कि उन्हें भी भर्ती में शामिल किया जाए। उन्होंने दलील दी कि जब 2012 में पात्रता परीक्षा ही नहीं हुई तो वे इसे पास कैसे करते। हाईकोर्ट ने उनके तर्क पर सहमति जताते हुए शिक्षक भर्ती बोर्ड को आदेश दिए कि 2013 में पात्रता परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों के प्रोविजनल इंटरव्यू लिए जाएं।

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